Loksaakshya Social

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

July 8, 2026

गढ़वाली कवि एवं साहित्यकार दीनदयाल बन्दूणी ‘दीन’ की गजल-तुम बि हीटा उनै

गढ़वाली कवि एवं साहित्यकार दीनदयाल बन्दूणी ‘दीन’ की गजल-तुम बि हीटा उनै।

तुम बि हीटा उनै

आजा- लोग, भैंडि- आदतौं से- लाचार ह्वी.
बात पीछा सब्यूंका, अलग-अलग बिचार ह्वी..

मुख समणि, एक मुठ-एक जुट कि बात कैरी,
पीठ पैथर सबका, अपणा-अपणा हत्यार ह्वी..

कैकि खबर-क्वी नि रखदू, क्वी- कै नि मनदू,
सब्यूं मनांणू-इक जनै ल्यांणू, सोच बेकार ह्वी..

मेरि सूणां – मेरि मांना, इनी त चल़णू आज,
पौ-पंचैतौं फैसलौं वऴा दिन, कख साकार ह्वी..

लाख करम कारा, बित्यूं बग्त बौणी नि आंदू,
आजा- यूँ हालातौं का, सबि त मददगार ह्वी..

छांटु न ह्वावा, बदल्या बग्ता चाल-ढाल देखी,
ढळ्- ढऴिकि जावा, जनै सब्यूंक ढऴार ह्वी..

‘दीन’ यो लोकतंत्र नी, येकु ब्वदीं नयुं लठतंत्र,
तुम बि- हीटति उनै, जनै सब्यूंका पौबार ह्वी..

कवि का परिचय
नाम-दीनदयाल बन्दूणी ‘दीन’
गाँव-माला भैंसोड़ा, पट्टी सावली, जोगीमढ़ी, पौड़ी गढ़वाल।
वर्तमान निवास-शशिगार्डन, मयूर बिहार, दिल्ली।
दिल्ली सरकार की नौकरी से वर्ष 2016 में हुए सेवानिवृत।
साहित्य-सन् 1973 से कविता लेखन। कई कविता संग्रह प्रकाशित।