Loksaakshya Social

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

October 29, 2026

चक्रवात अर्नब: गर्म समुद्र और अल नीनो ने बढ़ाई तूफान की ताकत

आंध्र प्रदेश के तट से 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से टकराया अर्नब चक्रवात। वैज्ञानिकों के मुताबिक, समुद्र का बढ़ता तापमान और अल नीनो तूफानों की तीव्रता बढ़ाने में भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन हर तूफान के पीछे एक ही वजह नहीं होती।
अब समझें इस तूफान के बारे में
28 अक्टूबर 2026 की सुबह आंध्र प्रदेश और यानम के तट पर चक्रवात अर्नब ने दस्तक दी। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मुताबिक, यह बेहद गंभीर चक्रवाती तूफान था। इसकी अधिकतम लगातार हवा की रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटा थी, जबकि झोंकों की रफ्तार 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुँच रही थी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

अर्नब की खासियत
अर्नब की खास बात इसकी तेज़ी से बढ़ती ताकत थी। यह 24 अक्टूबर को एक उष्णकटिबंधीय निम्न दबाव क्षेत्र के रूप में विकसित हुआ और अगले 36 घंटों में चक्रवाती तूफान बन गया। 26 अक्टूबर तक आईएमडी ने इसे ‘बेहद गंभीर’ श्रेणी में रख दिया।
मौसम वैज्ञानितों का तर्क
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्र का सामान्य से अधिक गर्म होना और वातावरण में बढ़ती गर्मी ऐसे तूफानों को ताकत दे सकती है। इस समय प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति भी बनी हुई है। हालांकि, किसी तूफान की तीव्रता को केवल अल नीनो या ग्लोबल वार्मिंग के आधार पर नहीं समझा जा सकता। भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्व महानिदेशक डॉ. के.जे. रमेश के मुताबिक, समुद्र की सतह का सामान्य से अधिक गर्म तापमान और अल नीनो की संभावित भूमिका अर्नब की तीव्रता बढ़ाने में योगदान दे सकती है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग अल नीनो को जन्म नहीं देती, लेकिन पहले से गर्म हो रही पृथ्वी पर इसका असर चरम मौसम की स्थितियों को और गंभीर बना सकता है। गर्म समुद्र तूफान को तेजी से मजबूत होने के लिए जरूरी गर्मी और नमी उपलब्ध कराते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

सवालः गर्म समुद्र तूफानों को कैसे देता है ऊर्जा
समुद्र से उठने वाले चक्रवातों को गर्म पानी से ऊर्जा मिलती है। गर्म समुद्र से अधिक पानी वाष्प बनकर वातावरण में जाता है। जब यह जलवाष्प संघनित होती है, तो गर्मी निकलती है, जो तूफान की प्रणाली को ऊर्जा दे सकती है। इस प्रक्रिया में समुद्र का तापमान अहम है, लेकिन केवल सतह का तापमान ही पूरी कहानी नहीं बताता। समुद्र में कितनी गहराई तक गर्म पानी मौजूद है, यह भी तूफान की ताकत को प्रभावित कर सकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

बढ़ता तापमान भी हो सकता है कारण
इस साल अक्टूबर में भूमध्यरेखीय मध्य प्रशांत महासागर की सतह का तापमान 22 अक्टूबर से करीब 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा। अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (एनओएए) के आँकड़ों के मुताबिक, प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय हिस्सों में बड़े क्षेत्र में रिकॉर्ड स्तर का तापमान दर्ज किया गया। अटलांटिक, हिंद और दक्षिणी महासागरों के कुछ हिस्सों में भी समुद्र का तापमान रिकॉर्ड ऊँचाई पर रहा।
सितंबर 2026 में वैश्विक समुद्री सतह का तापमान औसत से 1.10 डिग्री सेल्सियस अधिक था। यह किसी भी महीने के लिए दर्ज सबसे बड़ा अंतर था और अगस्त 2026 के पिछले रिकॉर्ड से भी थोड़ा अधिक था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इस कारण से बदलती हैं समुद्री परिस्थितियाँ
जलवायु वैज्ञानिकों के मुताबिक, समुद्र में जमा अतिरिक्त गर्मी का बड़ा हिस्सा महासागर सोख लेते हैं। इससे समुद्री परिस्थितियाँ बदलती हैं और कुछ क्षेत्रों में शक्तिशाली चक्रवातों के लिए अनुकूल हालात बन सकते हैं। हालांकि, चक्रवातों की संख्या और तीव्रता में बदलाव को समझने के लिए समुद्र के तापमान के साथ हवा, नमी, वायुमंडलीय परिस्थितियों और तूफानों के रास्ते का भी अध्ययन करना पड़ता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

अल नीनो का असर हर जगह एक जैसा नहीं
अल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र की सतह के सामान्य से अधिक गर्म होने की स्थिति है। यह वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण को बदल सकता है, जिससे अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश, सूखा, गर्मी और तूफानों के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बन सकती हैं। इसका मतलब यह नहीं कि अल नीनो के दौरान होने वाली हर चरम मौसमी घटना उसी की वजह से होती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

वैज्ञानिक का तर्क
ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के नेशनल सेंटर फॉर एटमॉस्फेरिक साइंस के रिसर्च साइंटिस्ट अक्षय देवरस के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में इस समय चक्रवात बनने के लिए बेहद अनुकूल परिस्थितियाँ हैं। उन्होंने कहा कि अल नीनो अर्नब के प्रभाव को बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है। देवरस के अनुसार, गर्म वातावरण में अधिक नमी मौजूद रह सकती है। इससे बादलों में नमी की मात्रा बढ़ने और बहुत तेज़ बारिश की संभावना बन सकती है। उनके मुताबिक, अर्नब के दौरान तेज़ बारिश के कई दौर देखने को मिल सकते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

भारत की स्थिति
भारत में मानसून के बाद का मौसम भी चक्रवातों के लिहाज से अहम होता है। भारतीय समुद्रों में चक्रवात बनने की गतिविधि दिसंबर में चरम पर पहुँचती है। आम तौर पर समुद्र की सतह का तापमान 27 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होना चक्रवात बनने के अनुकूल माना जाता है, लेकिन केवल इस तापमान तक पहुँच जाना चक्रवात बनने की गारंटी नहीं है। इसके लिए दूसरी वायुमंडलीय परिस्थितियाँ भी अनुकूल होनी चाहिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उत्तर हिंद महासागर में तेजी से मजबूत हो रहे तूफान
उपलब्ध वैज्ञानिक आकलनों के मुताबिक, उत्तर हिंद महासागर में कुछ चक्रवात बहुत कम समय में काफी ताकतवर हो रहे हैं। 2000 के बाद से इस क्षेत्र में करीब 38% चक्रवातों में तेजी से तीव्रता बढ़ने की स्थिति दर्ज की गई, जबकि उत्तर-पश्चिमी प्रशांत महासागर में यह अनुपात करीब 22% बताया गया है। तेजी से तीव्र होने वाले चक्रवात वे होते हैं जिनकी हवा की अधिकतम रफ्तार बहुत कम समय में काफी बढ़ जाती है। कुछ मामलों में 24 घंटे के भीतर हवा की रफ्तार 50 नॉट से अधिक बढ़ सकती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

बंगाल की खाड़ी में चक्रवात बनने की जगह पूर्व की ओर खिसकने से कुछ तूफानों को समुद्र के ऊपर अधिक समय मिल सकता है। इस दौरान वे गर्म समुद्र से ऊर्जा लेते रहते हैं, जिससे उनके बेहद गंभीर चक्रवात बनने की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि, यह बदलाव हर चक्रवात पर समान रूप से लागू नहीं होता।
समुद्र के गर्म होने से चक्रवात के भीतर और उसके आसपास भारी बारिश का क्षेत्र भी फैल सकता है। एक अध्ययन के मुताबिक, समुद्र की सतह का तापमान बढ़ने पर चक्रवात के केंद्र के आसपास बहुत भारी बारिश की तीव्रता बढ़ सकती है और बारिश का क्षेत्र केंद्र से 300 किलोमीटर से अधिक दूरी तक फैल सकता है। इसका असर तटीय इलाकों के साथ-साथ भीतर के क्षेत्रों में भी पड़ सकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

तट तक सीमित नहीं है चक्रवात का नुकसान
आंध्र प्रदेश चक्रवातों के लिहाज से संवेदनशील राज्य है। राज्य में औसतन हर साल कम से कम एक चक्रवात का खतरा रहता है और अक्टूबर-नवंबर में जोखिम अधिक होता है। आईएमडी के आँकड़ों के मुताबिक, 1891 से 2019 के बीच विभिन्न श्रेणियों के कुल 184 चक्रवाती सिस्टम, जिनमें निम्न दबाव क्षेत्र भी शामिल हैं, राज्य के तट से गुजरे। मध्यम से गंभीर चक्रवात हर दो से तीन साल में राज्य को प्रभावित कर सकते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

ये दिए गए तर्क
राज्य सरकार के मुताबिक, करीब 29 लाख लोग चक्रवातों के जोखिम में हैं। लगभग 33 लाख लोग समुद्र तट से पाँच किलोमीटर के दायरे में रहते हैं। 1975 के बाद से राज्य 60 से अधिक चक्रवातों का सामना कर चुका है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य और विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णा एस. वत्सा के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन के साथ जलवायु संबंधी खतरों की विविधता बढ़ रही है। भारत ने बेहतर तैयारी और समय पर पूर्वानुमान के जरिए चक्रवातों में होने वाली मौतों को कम करने में सफलता पाई है, लेकिन आर्थिक नुकसान अब भी बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि चक्रवातों का असर अब केवल तटीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं रह जाता। तूफान से जुड़ी बारिश, बाढ़ और दूसरी बाधाएँ राज्य के अंदरूनी हिस्सों को भी प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए आपदा से पहले की तैयारी में लगातार निवेश करना ज़रूरी है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

फ्लेम यूनिवर्सिटी में पब्लिक पॉलिसी के प्रोफेसर और जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल (आईपीसीसी) के लेखक अंजल प्रकाश ने कहा कि आपदा से होने वाले अप्रत्यक्ष नुकसान कई बार शुरुआती आकलन में सामने नहीं आते। बिजली कटने, सड़क और परिवहन बाधित होने या कारोबार रुकने से नुकसान कई स्तरों पर फैल सकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उनके मुताबिक, बाढ़ सहने वाली सड़कें, मजबूत बिजली ग्रिड, आपदा-रोधी मकान, फसल बीमा और कारोबार को जारी रखने की योजनाएँ नुकसान कम करने में मदद कर सकती हैं। जोखिम वाले इलाकों के नक्शों का इस्तेमाल आपदा से पहले घरों, बुनियादी ढाँचे और आजीविका की सुरक्षा के लिए किया जाना चाहिए। खास तौर पर छोटे कारोबारियों, किसानों और असंगठित क्षेत्र के कामगारों तक सुरक्षा और बीमा की पहुँच बढ़ाना जरूरी है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

दुनिया भर में बढ़ी चक्रवाती गतिविधि
एनओएए के मुताबिक, सितंबर 2026 में दुनिया भर में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की गतिविधि औसत से अधिक रही। इस दौरान 19 उष्णकटिबंधीय तूफान बने। इनमें से नौ चक्रवाती तूफान की ताकत तक पहुँचे और छह बड़े चक्रवात बने।
अटलांटिक महासागर में गतिविधि औसत से कम रही। वहाँ चार उष्णकटिबंधीय तूफान बने, लेकिन सितंबर के अंत तक कोई हरिकेन नहीं बना। उपग्रहों से नियमित निगरानी शुरू होने के बाद यह पहली बार था, जब अक्टूबर से पहले अटलांटिक में कोई हरिकेन दर्ज नहीं हुआ।
इसके उलट, पूर्वी उत्तर प्रशांत महासागर में गतिविधि रिकॉर्ड स्तर पर रही। सितंबर में आठ उष्णकटिबंधीय तूफान बने। इनमें से सात हरिकेन बने और पाँच बड़े हरिकेन की श्रेणी तक पहुँचे। इसी क्षेत्र में हरिकेन पोलो तेजी से मजबूत होकर श्रेणी-5 तक पहुँचा और वायुदाब के आधार पर रिकॉर्ड के सबसे शक्तिशाली तूफानों में शामिल हुआ। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन के एक अध्ययन में पाया गया कि हरिकेन पोलो की तीव्रता के लिए अल नीनो की भूमिका काफी महत्वपूर्ण थी, लेकिन जलवायु परिवर्तन का प्रभाव उससे भी बड़ा था। अध्ययन के अनुसार, मौजूदा अल नीनो की परिस्थितियों में सितंबर 2026 में तूफान की संभावित तीव्रता, सामान्य अल नीनो-न्यूट्रल परिस्थितियों के मुकाबले करीब 14 गुना अधिक संभावित थी। अध्ययन ने यह भी अनुमान लगाया कि समुद्र और वातावरण के गर्म होने के कारण इस क्षेत्र में ऐसी भारी बारिश की घटनाएँ ऐतिहासिक तुलना में लगभग छह गुना अधिक संभावित हो गई हैं और हर दो साल में एक बार होने वाली ऐसी बारिश करीब 57% अधिक भारी हो गई है। इन अनुमानों में काफी अनिश्चितता भी है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

यह नहीं है ठोस जवाब
इन निष्कर्षों का मतलब यह नहीं है कि हर तूफान या हर भारी बारिश की घटना का कारण जलवायु परिवर्तन या अल नीनो ही है। वैज्ञानिक किसी घटना में इन कारकों की भूमिका समझने के लिए वास्तविक मौसम के आँकड़ों, ऐतिहासिक रिकॉर्ड और मॉडल का मिलाकर अध्ययन करते हैं। चक्रवात अर्नब एक बार फिर दिखाता है कि गर्म होते समुद्र, वातावरण में बढ़ती नमी और बदलती जलवायु परिस्थितियाँ तूफानों के जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं, लेकिन नुकसान कितना होगा, यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि लोग और बुनियादी ढाँचा कितने तैयार हैं। समय पर चेतावनी से जानें बचाई जा सकती हैं। दीर्घकालिक तैयारी, सुरक्षित निर्माण और किसानों, कामगारों तथा छोटे कारोबारियों के लिए बेहतर सुरक्षा व्यवस्था से आपदा के आर्थिक और सामाजिक असर को भी कम किया जा सकता है।
नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो। यदि आप अपनी पसंद की खबर शेयर करोगे तो ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी। बस इतना ख्याल रखिए।

Bhanu Bangwal

लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।