आईपीओ खुलने से पहले जियो पर ₹2.5 लाख करोड़ के दांव, इश्यू साइज से 8 गुना ज्यादा मांग, अमेरिका-जर्मनी तक जियो की नजर

जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ खुलने से पहले ही निवेशकों में हलचल तेज हो गई है। एक तरफ रिटेल निवेशकों के लिए कई ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म्स पर प्री-बुकिंग यानी प्री-अप्लाई शुरू हो गई है, वहीं दूसरी तरफ बड़े बिजनेस मीडिया हाउस की रिपोर्ट के मुताबिक ग्लोबल और घरेलू संस्थागत निवेशकों ने जियो आईपीओ के लिए करीब ₹2.5 लाख करोड़ की शुरुआती मांग दिखाई है। यह करीब ₹30,200 करोड़ के पूरे आईपीओ साइज से आठ गुना से भी ज्यादा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जियो आईपीओ के लिए आई करीब ₹2.5 लाख करोड़ की शुरुआती संस्थागत मांग में विदेशी लॉन्ग-ओनली फंड्स, सॉवरेन वेल्थ फंड्स, बड़े म्यूचुअल फंड्स और बीमा कंपनियां शामिल हैं। हालांकि इसे अभी औपचारिक आईपीओ सब्सक्रिप्शन नहीं माना जा सकता। यह बड़े निवेशकों की शुरुआती मांग और अलॉटमेंट में दिलचस्पी का संकेत है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
अलॉटमेंट में दिलचस्पी दिखाने वाले बड़े निवेशकों में जीआईसी, नॉर्जेस बैंक इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी और कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी जैसे सॉवरेन फंड्स के साथ ब्लैकरॉक, फिडेलिटी और कैपिटल ग्रुप के नाम सामने आए हैं। घरेलू निवेशकों में एलआईसी, एसबीआई म्यूचुअल फंड और एचडीएफसी म्यूचुअल फंड जैसे बड़े नाम बताए गए हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)इधर, रिटेल निवेशकों के लिए जियो आईपीओ की प्री-बुकिंग शुरू हो गई है। कई ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म्स पर निवेशक अभी से अपना आवेदन दर्ज कर सकते हैं। हालांकि यह औपचारिक सब्सक्रिप्शन नहीं है। प्री-अप्लाई में निवेशक पहले से अपना ऑर्डर दर्ज करता है, जिसे आईपीओ खुलने के बाद आगे प्रोसेस किया जाता है। जियो आईपीओ का प्राइस बैंड ₹1,065 से ₹1,119 प्रति शेयर है और न्यूनतम लॉट 12 शेयरों का है। ऊपरी प्राइस बैंड पर एक लॉट के लिए ₹13,428 की जरूरत होगी। आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इससे पहले एंकर निवेशकों के लिए बिडिंग 19 अक्टूबर को होगी। इसके बाद तस्वीर साफ होगी कि अभी दिख रही भारी संस्थागत दिलचस्पी औपचारिक एंकर अलॉटमेंट और बाद में आईपीओ सब्सक्रिप्शन में किस स्तर तक बदलती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
भारत में बड़े पैमाने पर साबित टेक्नोलॉजी को अब दुनिया तक ले जाने की तैयारी
जियो के आईपीओ से पहले देशभर से मुंबई में जुटे ब्रोकर्स से बातचीत के दौरान एक सवाल के जवाब में जियो प्लेटफॉर्म्स के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी ने कंपनी के ग्लोबल प्लान का अब तक का सबसे ठोस संकेत दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में करीब 12 रणनीतिक साझेदारियों के जरिए जियो की टेक्नोलॉजी 150 करोड़ अतिरिक्त यूजर्स तक पहुंच सकती है। अमेरिका और जर्मनी जैसे विकसित देशों से लेकर पूर्वी एशिया, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका तक जियो संभावनाएं देख रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
जियो पहले भी अपने इंटरनेशनल बिजनेस और इन-हाउस विकसित टेक्नोलॉजी स्टैक को विदेशी बाजारों में ले जाने की बात करता रहा है। लेकिन अब पहली बार इस योजना का संभावित पैमाना सामने आया है। यानी ग्लोबल विस्तार की कहानी सिर्फ इरादे तक सीमित नहीं है। कंपनी अब संभावित साझेदारियों और उनसे जुड़ सकने वाले यूजर बेस को संख्या में देख रही है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
आकाश अंबानी के मुताबिक जियो का अवसर केवल उन देशों में नहीं है जहां डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कमजोर है। अमेरिका और जर्मनी जैसे विकसित बाजारों में भी फाइबर रोलआउट की मौजूदा स्थिति कंपनी के लिए अवसर पैदा कर सकती है। इसके अलावा पूर्वी एशिया, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका भी संभावित बाजारों में शामिल हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कंपनी का इरादा इन देशों में सीधे जाकर टेलीकॉम ऑपरेटर बनने का नहीं, बल्कि स्थानीय ऑपरेटर्स के साथ साझेदारी कर अपना टेक्नोलॉजी स्टैक उपलब्ध कराने का है। जियो अपने इंटीग्रेटेड होम ब्रॉडबैंड स्टैक को ऐसे ही एक बड़े ग्लोबल अवसर के रूप में देखता है। आकाश ने कहा कि टेक्नोलॉजी बनाना और उसे बड़े पैमाने पर सफलतापूर्वक चलाना दो अलग क्षमताएं हैं और जियो इन दोनों को भारत में साबित कर चुका है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
यही इस कहानी को जियो से आगे भारत के लिए भी महत्वपूर्ण बनाता है। भारत लंबे समय तक दुनिया की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए विशाल यूजर मार्केट रहा है। अब जियो की कोशिश भारत में विकसित और भारत में करोड़ों लोगों के बीच scale की गई टेक्नोलॉजी को दुनिया के दूसरे बाजारों तक पहुंचाने की है। आकाश अंबानी पहले भी भारत के लिए टेक्नोलॉजी आयातक से टेक्नोलॉजी निर्यातक बनने की संभावना की बात कर चुके हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस ग्लोबल प्लान में होम ब्रॉडबैंड के अलावा 5G भी अहम हिस्सा हो सकता है। कंपनी अलग-अलग देशों की जरूरतों के मुताबिक अपने टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म के लिए अलग-अलग बाजार देख रही है। अगर ये साझेदारियां आकार लेती हैं, तो जियो के लिए यह विदेशी बाजारों से कमाई का नया रास्ता होगा। साथ ही भारत के लिए इसका बड़ा संदेश यह होगा कि देश अब केवल टेक्नोलॉजी का बड़ा उपभोक्ता नहीं, बल्कि उसे बनाने, बड़े पैमाने पर चलाने और दुनिया को देने वाला खिलाड़ी बनने की दिशा में बढ़ रहा है।
नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो। यदि आप अपनी पसंद की खबर शेयर करोगे तो ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी। बस इतना ख्याल रखिए।

Bhanu Bangwal
लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।



