सोने का हिरन राम को ले गया दूर, लक्ष्मण गए भाई की मदद करने, रावण ने किया सीता का हरण

रामलीला मंचन में काम, क्रोध, लोभ आदि मानव के इन दुश्मन से सचेत और सतर्क रहने का संदेश देता है। इन दिनों नवरात्र पर देशभर के विभिन्न हिस्सों में जगह जगह रामलीला का मंचन हो रहा है। देहरादून में डोईवाला क्षेत्र में स्थित हिमालयन रिक्रिएशनल एंड वेलफेयर ट्रस्ट की ओर से स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय, जौलीग्रांट के सेंट्रल पार्क में चल रहे रामलीला महोत्सव के छठवें दिन सीता हरण, शबरी भक्ति, हनुमान अवतरण और सुग्रीव दरबार का भावपूर्ण मंचन किया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कहते हैं कि जब आंखों में लालच आ जाए तो नुकसान होना तय है। इसी बात को रामलीला मंचन के साथ दर्शाया गया। सोने का हिरन देखकर सीता भी लोभ के वशीभूत हो जाती हैं और स्वर्ण मृग को पकड़ने के लिए राम को विवश करती है। मंचन की शुरुआत बूढ़े मारीच प्रसंग से हुई। स्वर्ण मृग बनकर मारीच श्रीराम को कुटी से दूर ले गया। वहीं, राम की मदद की गुहार की आवाज से विचलित सीता ने लक्ष्मण को भाई की मदद के लिए भेज दिया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इसी बीच साधु का वेश धारण कर रावण पंचवटी पहुंचा और छलपूर्वक माता सीता का हरण कर लिया। सीता माता के -‘हे राम-हे लक्ष्मण’ की करुण पुकार सुनकर पूरा पंडाल भावुक हो उठा। जटायु वध का प्रसंग भी दर्शकों को भावविह्वल कर गया। इसके बाद शबरी भक्ति का प्रसंग दिखाया गया। वर्षों से श्रीराम की प्रतीक्षा कर रही शबरी ने बेर खिलाकर अपनी अनन्य भक्ति का परिचय दिया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
प्रभु श्रीराम ने प्रेम से जूठे बेर ग्रहण किए, यह दृश्य देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं। श्रीराम और हनुमान मिलन और सुग्रीव दरबार के मंचन ने दर्शकों को खूब आकर्षित किया। रामलीला के सातवें दिन 17 अक्टूबर की शाम को बाली सुग्रीव युद्ध, अशोक वाटिका प्रसंग, अक्षय कुमार वध, मेघनाद प्रसंग व लंका दहन का मंचन होगा।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।



