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October 16, 2026

शारदीय नवरात्र आज से शुरू, जानिए कलश स्थापना का मुहूर्त, इन बातों का रखें ध्यान

साल 2026 में शारदीय नवरात्र की शुरुआत आज रविवार 11 अक्टूबर से हो रही है और इसका समापन 19 अक्टूबर को होगा। दशहरा पर्व 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। शारदीय नवरात्र हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना के साथ मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। इसके बाद अगले आठ दिनों तक मां ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। भक्त इस दौरान व्रत रखते हैं, दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कलश स्थापना का मुहूर्त
कलश स्थापना (घटस्थापना) शुभ मुहूर्त 2026 11 अक्टूबर 06:19 AM से 10:12 AM
कलश स्थापना (घटस्थापना) अभिजित मुहूर्त 11 अक्टूबर11:44 AM से 12:31 PM
प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर 2026 को 09:19 PM से शुरू हो गई, इसका समापन 11 अक्टूबर 2026 को 09:30 PM बजे होगा।
चित्रा नक्षत्र प्रारम्भ 10 अक्टूबर 2026 को 09:42 PM से शुरू हो गया, इसका समापन 11 अक्टूबर 2026 को 10:32 PM बजे (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कलश स्थापना (घटस्थापना) विधि
-घर में जहां भी कलश स्थापना कर रहे हैं उस स्थान को गंगाजल से शुद्ध कर लें।
-कलश स्थापना के लिए पूर्व या उत्तर दिशा के अलावा ईशान कोण भी शुभ माना जाता है।
-कलश स्थापना वाले स्थान पर थोड़ी सी साफ मिट्टी बिछा दें और फिर उस पर जौ के दाने डाल दें।
-फिर जौ के दानों पर थोड़ी सी मिट्टी डालकर उसे अच्छी तरह ढक दें। इसके बाद थोड़ा सा जल छिड़कें।
-इसके बाद एक कलश में जल और गंगाजल भर लें और उसमें एक सिक्का भी डाल दें।
अब कलश के ऊपर अशोक या आम के पत्ते रखें।
-कलश पर कलावा बांधें और इसके मुख पर मिट्टी का कटोरा रखें और उस कटोरे को जौ या चावल से ढक दें।
-फिर एक जटा वाला नारियल लाल चुन्नी में लपेटकर उस कलश के ऊपर रख दें।
-इस विधि से कलश स्थापना करने के बाद देवी का आह्वान करें।
-ध्यान रहे कि नवरात्रि में माता रानी की पूजा के साथ-साथ कलश की भी पूजा करनी है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

नवरात्र में इन बातों का रखें ध्यान
नवरात्र के दौरान भक्त अपनी पारिवारिक परंपरा और श्रद्धा के अनुसार व्रत, पूजा-पाठ और आरती करते हैं। घटस्थापना का शुभ मुहूर्त स्थानीय पंचांग से जांचें। अष्टमी और नवमी के अनुष्ठानों की तारीख तय करने से पहले तिथि के समय की पुष्टि करें।
कलश स्थापना में इन बातों का रखें ध्यान
-पूजा में कभी भी लोहे या स्टील से बने कलश का प्रयोग न करें। हमेशा तांबे, पीतल या मिट्टी के कलश का ही उपयोग करें।
-कलश स्थापना हमेशा घर के ईशान कोण या पूर्व दिशा में ही करनी चाहिए।
-कलश के अंदर हमेशा साफ, ताजा और शुद्ध जल भरना चाहिए।
-कलश के ऊपर रखे जाने वाले चावल टूटे हुए नहीं होने चाहिए। इसके अलावा नारियल या आम/पान के पत्ते खंडित नहीं होने चाहिए।
-कलश स्थापना कभी भी रसोईघर या शौचालय के पास वाले स्थान पर नहीं करनी चाहिए। पूजा स्थल पूरी तरह साफ-सुथरा होना चाहिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

दशहरा 20 अक्टूबर को
शारदीय नवरात्र के दौरान दुर्गा अष्टमी और महानवमी का विशेष महत्व होता है। वर्ष 2026 में तिथियों के संयोग के कारण कुछ पंचांगों में 19 अक्टूबर को महाष्टमी और महानवमी से जुड़े अनुष्ठान बताए गए हैं। इसलिए कन्या पूजन, हवन और व्रत पारण का समय तय करने से पहले अपने स्थानीय पंचांग की जांच जरूर करें। विजयादशमी यानी दशहरा 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

मुख्य तिथियां
पहला दिन: 11 अक्टूबर 2026, मां शैलपुत्री की पूजा- नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है। इसी दिन घटस्थापना या कलश स्थापना के साथ नवरात्र पूजा का शुभारंभ होता है। मां शैलपुत्री को शक्ति और प्रकृति का प्रतीक माना जाता है।
दूसरा दिन: 12 अक्टूबर 2026, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा- दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। धार्मिक मान्यताओं में देवी का यह स्वरूप तपस्या, संयम, धैर्य और साधना का प्रतीक माना जाता है।
तीसरा दिन: 13 अक्टूबर 2026, मां चंद्रघंटा की पूजा- नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। देवी का यह स्वरूप साहस, शौर्य और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा का प्रतीक माना जाता है।
चौथा दिन: 14 अक्टूबर 2026, मां कूष्मांडा की पूजा- चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा का विधान।
पांचवां दिन: 15 अक्टूबर 2026, मां स्कंदमाता की पूजा- पांचवें दिन मां स्कंदमाता की आराधना की जाती है। देवी को भगवान कार्तिकेय की माता के रूप में पूजा जाता है। भक्त परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना करते हैं।
छठा दिन: 16 अक्टूबर 2026, मां कात्यायनी की पूजा- नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। देवी का यह स्वरूप शक्ति, साहस और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक माना जाता है।
सातवां दिन: 17 अक्टूबर 2026, मां कालरात्रि की पूजा- सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना की जाती है। मां कालरात्रि को नकारात्मकता और भय का नाश करने वाली देवी माना जाता है।
आठवां दिन: 18 अक्टूबर 2026, मां महागौरी की पूजा- परंपरागत नवदुर्गा क्रम में आठवें दिन मां महागौरी की पूजा होती है। देवी का यह स्वरूप शांति, पवित्रता और करुणा का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, 2026 में तिथि के स्थानीय पंचांग के अनुसार क्रम और अनुष्ठानों में अंतर हो सकता है।
नौवां दिन: 19 अक्टूबर 2026, मां सिद्धिदात्री की पूजा- नवदुर्गा परंपरा में नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। उन्हें सिद्धियों और आध्यात्मिक उन्नति की देवी माना जाता है। इस दिन कई परिवारों में कन्या पूजन, हवन और विशेष पूजा की जाती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

नवरात्रि का कलश का विसर्जन
नवरात्रि के कलश का विसर्जन दशहरा के दिन होता है। इस बार कलश विसर्जन 20 अक्तूबर को किया जाएगा। दशहरे के दिन कलश विसर्जन करने से पहले कलश के जल को पूरे घर में जरूर छिड़के। कहते हैं इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
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Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।