यूएनजीए में जलवायु का एजेंडा: नेपाल की आपदा से लॉस एंड डैमेज तक, दुनिया की नजर अब कोप 31 पर
संयुक्त राष्ट्र महासभा का नया सत्र ऐसे समय में हो रहा है, जब जलवायु संकट की कीमत अब केवल तापमान, उत्सर्जन या मौसम के आंकड़ों में नहीं दिखाई देती। नेपाल में पिछले महीने हुई विनाशकारी ग्लेशियर आपदा ने इस बहस को सीधे उन लोगों की जिंदगी और नुकसान से जोड़ दिया है, जो जलवायु संकट में सबसे कम योगदान देने के बावजूद उसके असर का सामना कर रहे हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
नेपाल के प्रधानमंत्री अगले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने वाले हैं। UNGA के लिए तैयार किए गए एक climate curtain-raiser के मुताबिक, नेपाल की इस त्रासदी ने Global South के वार्ताकारों के बीच चिंता बढ़ाई है और संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन सम्मेलन का 31वां सत्र (31st Conference of the Parties) COP31 में Loss and Damage Fund के लिए संसाधन जुटाना प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
नेपाल के विदेश मंत्री Shisir Khanal ने कहा है कि नेपाल के लिए मिलने वाली मदद को aid या charity के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब जलवायु आपदाओं से होने वाले आर्थिक नुकसान का पैमाना लगातार बड़ा हो रहा है। दस्तावेज़ के मुताबिक, बीमा उद्योग का अनुमान है कि जलवायु से जुड़े नुकसान अब हर साल 171 अरब डॉलर तक पहुंच रहे हैं, जो एक साल पहले के अनुमान से 19 अरब डॉलर अधिक है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
UNGA के बाद निगाहें COP31 पर होंगी, जिसकी मेजबानी Turkiye और Australia से जुड़ी है। दोनों देशों के बीच COP31 के नतीजों को लेकर decision-making की स्पष्टता पर नजर रहेगी। इस बीच दोनों Presidencies ने electrification के नए वैश्विक लक्ष्यों को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। हालांकि, curtain-raiser के मुताबिक फिलहाल यह पहल formal negotiations के बाहर रहने की उम्मीद है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
21 सितंबर को Türkiye अपनी “Action Agenda” भी पेश करने वाला है। इसमें 10 initiatives शामिल होने की उम्मीद है। इसी दौरान छह देशों की घोषणा भी हो सकती है, जिन्हें “Climate Implementation Bridge” में शामिल किया जाएगा। यह पहल electrification drive के लिए financing से जुड़े pilot projects पर केंद्रित होगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
Electrification COP31 की तैयारी में एक बड़ा विषय बनता दिख रहा है। Türkiye के राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdoğan के UNGA में electrification pledge पर बोलने की उम्मीद है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसके विवरण अभी स्पष्ट नहीं हैं। इसमें देशों द्वारा electrification के लिए GDP का एक निश्चित हिस्सा लगाने जैसी प्रतिबद्धता शामिल हो सकती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
21 और 22 सितंबर को Global Renewables Alliance summit में भी अधिक देशों के इस government initiative से जुड़ने की उम्मीद है। यह पहल जून में London Climate Action Week के दौरान शुरू की गई थी। इस पूरी बहस के बीच climate finance फिर केंद्र में रहेगा। संयुक्त राष्ट्र महासचिव बुधवार को UN Climate Summit में दुनिया के नेताओं से 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य को जिंदा रखने के लिए अब तक हुई प्रगति, climate finance जुटाने और adaptation पर किए गए काम के बारे में बताने को कहेंगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
Climate action में केवल नई घोषणाएं ही नहीं, fossil fuels से बाहर निकलने की ठोस योजनाएं भी चर्चा में हैं। France और Netherlands ने fossil fuels से transition के लिए national roadmaps प्रकाशित किए हैं। COP31 से पहले Presidencies पर इस बात का दबाव बढ़ रहा है कि electrification targets को clean power, developing और vulnerable economies के लिए financial support और घरेलू स्तर पर ठोस कार्रवाई के साथ जोड़ा जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इसी संदर्भ में coal phase-out dates जैसे binding measures का भी उल्लेख किया गया है। यानी climate commitments की चर्चा अब केवल long-term targets तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि देशों की घरेलू नीतियां उन लक्ष्यों को किस हद तक लागू करती हैं। समुद्र भी UNGA से COP31 तक के climate agenda में जगह बना रहा है।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।



