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August 30, 2026

इंसानियत ने बचाई 17 वर्षीय अभिजीत की जिंदगी, समाजसेवी मोहन खत्री ने नि:शुल्क उपलब्ध कराईं जीवनरक्षक दवाइयां

गंभीर बीमारी से जूझ रहे 17 वर्षीय अभिजीत की जिंदगी बचाने में चिकित्सा टीम के साथ समाजसेवी मोहन खत्री की मानवीय पहल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मूल रूप से सुंदरनगर, जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम, झारखंड) निवासी अभिजीत के प्लेटलेट्स बेहद कम हो गए थे और उसकी हालत गंभीर बनी हुई थी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार इलाज के लिए हरिद्वार जिला अस्पताल, रुड़की, एम्स, जॉलीग्रांट और महंत इंद्रेश अस्पताल तक भटकता रहा। अभिजीत के पिता देवनाथ होटल में काम कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। महंगे इलाज का खर्च उठाना उनके लिए बेहद मुश्किल था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

ऐसे कठिन समय में राज्य आंदोलनकारी एवं समाजसेवी मोहन खत्री ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया। NEBA Care Foundation के माध्यम से उन्होंने करीब 40 हजार रुपये की जीवनरक्षक दवाइयां और आवश्यक मेडिकल सामग्री नि:शुल्क उपलब्ध कराई। इसके साथ ही उन्होंने उपचार के दौरान परिवार का लगातार सहयोग किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

देहरादून में दून अस्पताल के डॉ. अशोक, उनकी टीम और अस्पताल के स्टाफ की मेहनत, समय पर मिले उपचार और करीब 30 दिनों तक ICU में चले इलाज के बाद अभिजीत की हालत में सुधार हुआ है। अब वह ICU से निकलकर जनरल वार्ड में पहुंच चुका है। मोहन खत्री पिछले कई वर्षों से समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वह करीब 30 वर्षों से रेड क्रॉस सोसाइटी से जुड़े हैं और पिछले पांच वर्षों से कोषाध्यक्ष के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है। इसके अलावा वह अब तक करीब 150 रक्तदान शिविरों के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

स्थानीय लोगों के बीच सेवा कार्यों के चलते मोहन खत्री को स्नेह से “मामा” के नाम से भी जाना जाता है। अभिजीत की मदद की इस पहल को इंसानियत और समाजसेवा की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। इस घटना ने एक बार फिर संदेश दिया है कि संकट की घड़ी में यदि समाज के सक्षम लोग जरूरतमंदों का हाथ थामें, तो मुश्किल परिस्थितियों में भी उम्मीद की नई किरण पैदा की जा सकती है।
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Bhanu Bangwal

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मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।