महिला ने सीएम को सौंपा ज्ञापन, शाम तक मिली सिलाई मशीन, क्या सबके साथ ऐसा होगा, या फिर प्रचार का तरीका
इन दिनों उत्तराखंड सरकार की ओर से ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ नाम से कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस कार्यक्रम का प्रचार प्रसार भी जोरों पर है। हालांकि, अब वेब न्यूज पोर्टलों या समाचार पत्रों को सरकार ने काफी समय से विज्ञापन जारी करने बंद कर दिए हैं। इनके माध्यम से सरकार मुफ्त में अपना प्रचार करा रही है। वहीं, सरकार की ओर से ऐसा जताया जा रहा है कि उसे एक एक नागरिक की चिंता है। इसी तरह के एक कार्यक्रम के तहत देहरादून के सहसपुर में बहुउद्देशीय शिविर लगाया गया। दावा किया गया कि इसमें मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने जनसमस्याओं को सुना। अधिकारियों को उनका त्वरित एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
शिविर को इवेंट में बदलना था तो कुछ नया होना चाहिए था। ऐसे में शिविर में स्थानीय निवासी बबली गुप्ता ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया। बताया कि वह जूट बैग बनाकर अपनी आजीविका चलाना चाहती हैं। इसके लिए उन्हें सिलाई मशीन की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को सिलाई मशीन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इस छोटी सी कहानी का संदेश ये है कि सीएम आम लोगों की समस्याओं को लेकर संवेदनशील हैं। वहीं, लोगों का कहना है कि क्या ऐसी संवेदनशीलता सबके साथ दिखाई जाती है या फिर ये प्रचार के लिए प्रायोजित कार्यक्रम था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
एक सिलाई मशीन को देने में जितनी तत्परता दिखाई गई, क्या ऐसी तत्परता जिला मुख्यालयों में न्याय मांगने के लिए आने वाले लोगों के प्रति भी दिखाई जा रही है। या फिर सिलाई मशीन देना एक पहले से स्क्रीप्ट में लिखा गया था। बताया गया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में अपर सचिव मुख्यमंत्री बंशीधर तिवारी के समन्वय से महिला को उसी शाम को ही सिलाई मशीन उपलब्ध करा दी गई। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इससे बबली गुप्ता को जूट बैग निर्माण के माध्यम से अपनी आजीविका सुदृढ़ करने और स्वरोजगार से जुड़ने में सहायता मिलेगी।सिलाई मशीन प्राप्त होने पर बबली गुप्ता ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की त्वरित कार्रवाई से उनके स्वरोजगार की राह आसान हुई है। इस कार्य के लिए हम भी सरकार को धन्यवाद देते हैं, लेकिन ऐसी घटनाएं ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। यदि वाकई में महिलाओं के प्रति सरकार चिंतनशील है तो एक दिन में हजारों ऐसी गरीब महिलाओं की मदद की जाती तो बड़े फलक की खबर बनती।
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