न्यूनतम वेतन में वृद्धि सहित विभिन्न मांगों को लेकर सीटू का उप श्रमायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन
सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) ने न्यूतम वेतन 26000 रु करने सहित अन्य मांगों को लेकर देहरादून में उप श्रमायुक्त कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया। इस दौरान श्रमायुक्त, श्रम सचिव के साथ ही मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किए गए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
देहरादून के अजबपुर स्थित उप श्रमायुक्त कार्यालय के समक्ष सीटू से जुड़े कार्यकर्ता एकत्रित हुए और प्रदर्शन किया। इस दौरान सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों का विरोध किया गया। साथ ही न्यूनतम वेतन 26000 रु करने, मजदूर विरोधी चारों श्रम सहिताएं रद्द करने, श्रम कानून बहाल करने को लेकर जबरदस्त नारेबाजी की गई। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस अवसर पर सीटू के जिला महामंत्री लेखराज ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार व राज्य कि धामी सरकार की ओर से 44 श्रम कानूनों के स्थान पर चार श्रम सहिताएं लागू करने के लिए 20 नवम्बर 2025 को ही घोषणा कर दी थी। तभी से श्रमिकों के पक्ष के सारे कानून न्यूनतम मजदूरी भुगतान अधिनियम, मजदूरी संदाय अधिनियम, उपादन संदाय अधिनियम, बोनस भुगतान अधिनियम सहित अन्य श्रम कानूनों को समाप्त कर दिया गया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस कारण इन अधिनियमों के तहत कोई भी वाद योजित नहीं हो रहा है। इससे मजदूरों को कोई राहत या उनका भुगतान से संबंधित वादों पर सुनवाई नहीं हो रही है। इसका सीटू पुरजोर विरोध करती है। साथ ही मांग करती है कि तत्काल इन श्रम कानूनों के तहत मजदूरों के वाद लगाए जाये। सीटू के जिला सचिव अभिषेक भंडारी ने कहा कि उत्तराखंड में मजदूरों की आमदनी बहुत कम है। इससे आज की परिस्तिथियो में घर का खर्च चलना मुश्किल हो रहा है। साथ ही उद्योगो में शोषण चरम पर है। वहां 12से 14 घंटे काम करवाया जाता है। इसके बावजूद न्यूनतम वेतन तक नहीं दिया जाता है। इससे श्रमिकों के मध्य असंतोष बढ़ रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस अवसर पर सीटू के जिला उपाध्यक्ष भगवंत पयाल ने कहा कि सरकार द्वारा न्यूनतम वेतन सलाहकार समिति में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों को न रख के पूंजीपतियों के प्रतिनिधियों को ही रखा गया है। इससे श्रमिकों का पक्ष रखने वाला कोई नहीं होता है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के प्रतिनिधियों को इन समितियों में रखा जाना चाहिए। ताकि मजदूरों के हितो में नीतियों को बनवाया जा सके। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा की इसी प्रकार भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड, ईपीएफ, ईएसआई सहित कई महत्वपूर्ण समितियों में मजदूरों का भविष्य तय होता है। वहाँ पर भी श्रमिकों के प्रतिनिधियों को न रखा जाना सरकार कि नियत पर सवाल खड़ा करता है। इस अवसर पर सभी ने मुख्य रूप से न्यूनतम मजदूरी 26000 रुपये करने कि मांग की। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस अवसर पर अपर श्रमायुक्त अनील पेटवाल को इस संदर्भ में ज्ञापन सौपा गया। इस पर उन्होंने आश्वास्त किया कि इन मंगो को वह शासन के समक्ष रखेंगे। उनके आश्वासन के पश्चात प्रदर्शन समाप्त किया गया। साथ ही सरकार को चेतावनी दी गयी कि सीटू श्रमिकों की मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखेगी।
प्रदर्शन करने वालों में सीटू के कोषाध्यक्ष रविन्द्र नौडियाल, सचिव प्रेमा, सोनू कुमार, बबलू प्रकाश, जसवीर तोमर, विपिन रावत, जितेंद्र बिजलवाण, अनिल तोमर, सुनील कुमार, राजू, नरेन्द्र सिंह, मनिंदर बिष्ट, शहज़ाद, प्रदीप उनियाल, हरीश कुमार, मुरारी सिंह राणा, रमेश उनियाल, राकेश कुमार, मदन सेमवाल, पदम सिंह, अंकित तोमर, संत राम, सीतेश तोमर, शिवम् शाहु, सुरेन्द्र कुमार आदि शामिल थे।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


