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April 17, 2026

पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा प्रणाली का संगम, भर्ती मरीजों को योग सिखा रहा एम्स ऋषिकेश का आयुष विभाग

एम्स ऋषिकेश के आयुष इंटीग्रेटिव मेडिसिन विभाग ने निवारक और समग्र स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देने के लिए व्यापक एजेंडा तैयार किया है। इस पहल में आईपीडी वार्डों में बेड साइड योग, देखभाल कर्ताओं के लिए वेलनेस कार्यक्रम और रोगी-केंद्रित प्रथाओं को आयुष तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की पहलों के साथ जोड़ा गया है। यह कार्यक्रम भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को आधुनिक चिकित्सा के साथ साक्ष्य-आधारित रूप से एकीकृत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे रोगियों को मानक उपचार के साथ-साथ समग्र स्वास्थ्य देखभाल प्राप्त हो सकेगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

संस्थान में होलिस्टिक हेल्थ केयर को बढ़ावा देने के लिए एम्स के आयुष विभाग ने सरकारी नीतियों के अनुरूप वाई-ब्रेक प्रोटोकॉल को अपनाया है। यह 10 मिनट का कार्य स्थल वेलनेस मॉड्यूल है। इसके तहत हेल्थ केयर वर्करों को तरोताजा करने तथा तनाव कम करने के लिए आयुष मंत्रालय द्वारा विकसित किया गया है। उद्देश्य है कि आयुष प्रणालियाँ निवारक चिकित्सा (प्रिवेन्टिव हेल्थ) ढाँचों में एकीकृत की जा सके। ताकि लोगों की जीवन-शैली, मानसिक स्वास्थ्य और दीर्घकालिक रोगों की रोकथाम में बेहतर सुधार हो। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

आयुष इंटिगे्रटिव मेडिसिन विभाग की हेड डॉ. मोनिका पठानिया ने बताया कि विभाग का इंटीग्रेटिव दृष्टिकोण राष्ट्रीय समग्र स्वास्थ्य दृष्टि को दर्शाता है, जहाँ बेडसाइड योग और आयुष प्रथाएँ आधुनिक चिकित्सा को पूरक करती हैं। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम को सफल बनाने में वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी आयुष डॉ. श्रीलोय मोहन्ती, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा आयुष विभाग की मेडिकल ऑफिसर डॉ. श्वेता मिश्रा और सिद्ध आयुष विभाग की डॉ. मिरून लेनी पी. की टीम शामिल है। बता दें कि आयुष विभाग में उच्च रक्तचाप व मधुमेह जैसे रोगों के इलाज हेतु विशिष्ट मॉड्यूल बनाए गए हैं। ऐसे रोगी प्रत्येक शुक्रवार को इंटीग्रेटिव मेडिसिन ओपीडी में देखे जाते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

नियमित सेवा बन चुकी है डसाइड योग चिकित्सा
आयुष विभाग के इंटिग्रेटेड मेडिसिन विभाग के तहत संचालित बेडसाइड योग चिकित्सा नियमित सेवा बन चुकी है। इसके तहत योगिक श्वसन और प्राणायाम अभ्यास मानको को पूरा करने के लिए पिडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी वार्ड में भर्ती रोगियों का तनाव कम करने और जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए नियमित स्तर पर योग करवाया जा रहा है। जेरियाट्रिक वार्ड में करवाया जा रहा योग गतिशीलता और लचीलापन केंद्रित है। यह योग सत्र बुजुर्ग रोगियों को तनाव प्रबंधन और बेहतर स्वास्थ्य में मदद करता है। यूरोलॉजी वार्ड में मूत्र रोगियों के लिए सर्जरी से पहले और सर्जरी के बाद विशेष योग सत्रों का आयोजन किया जाता है। इससे रिकवरी में मदद मिलती है। विभाग ने इन लाभों को और आगे बढ़ाने के लिए विशेष क्लीनिक स्थापित किए हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

लाइफ स्टाइल क्लीनिक- आहार, योग और जीवन शैली संशोधनों के माध्यम से निवारक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना।
बाल चिकित्सा अस्थमा क्लीनिक- श्वसन स्वास्थ्य के लिए श्वसन अभ्यास और कोमल आसन करवाना।
इसके अलावा पेशेवर थकान को दूर करने के लिए एक समर्पित प्रोफेशनल बर्न आउट और वेल बीइंग क्लीनिक में नियमित तौर पर 15-20 मिनट के योग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इसमें डॉक्टरों, नर्सों और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों (जेरियाट्रिक मेडिसिन, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन, टेलीमेडिसिन, यूरोलॉजी और नेत्र विज्ञान) को शामिल किया जाता है। यही नहीं देखभाल कर्ताओं और रोगी परिचारकों को भी संरचित तनाव-प्रबंधन सत्रों और ओपीडी वेटिंग एरिया में छोटे वाई-ब्रेक अभ्यासों के माध्यम से योग करने हेतु प्रोत्सोहित किया जा रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

व्यायाम तक सीमित नहीं है योग
एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह के अनुसार, योग अब व्यायाम तक सीमित नहीं है। अब इसे जीवन दर्शन के रूप में देखा जाने लगा है। परंपरागत और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान एक दूसरे के सहयोगी बन रहे हैं। शरीर और मन के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए जरूरी है कि हम योग और प्राणायाम के साथ ही होलिस्टिक हेल्थ को अपनाएं। इससे हम न केवल समग्र स्वास्थ्य की ओर अग्रसर होंगे, अपितु स्वास्थ्य के क्षेत्र को भी इससे मजबूती मिलेगी।
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Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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