मांगों को लेकर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद का जनजागरण अभियान जारी, गेट मीटिंग के जरिये कर्मचारियों को दी जा रही ये जानकारी
उत्तराखंड में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद अब कार्मिकों की 18 सूत्रीय मांग को लेकर सरकार से आरपार की लड़ाई लड़ने के मूड में है। मांगों को लेकर परिषद ने चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। इसके तहत पहले चरण में 15 जनवरी से विभिन्न विभागों में गेट मीटिंग के माध्यम से जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही कार्मिकों को मांगों के संबंध में जानकारी दी जा रही है। गेट मीटिंग का कार्यक्रम 31 जनवरी तक चलेगा। इसी के तहत आंदोलन के सातवें दिन जिला कोषागार देहरादून से आंदोलन की शुरुआत की गई। इसके पश्चात कार्यालय निबन्धन, महिला कल्याण विभाग में गेट मीटिंग आयोजित की गई। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कार्यक्रम की शुरुआत परिषद के संरक्षक चौधरी ओमवीर सिंह ने की। उन्होंने परिषद के इतिहास एवं पूर्व में कर्मचारियों के हित में किए गए संघर्षों की विस्तार से जानकारी दी। साथ ही आंदोलन की रूपरेखा को सही समय पर उठाया गया कदम बताते हुए कहा कि कर्मचारियों की जायज मांगें शीघ्र पूरी होंगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कोषागार संघ के जिलाध्यक्ष दिवाकर कोठारी ने कोषागार संघ की ओर से परिषद के पदाधिकारियों को आश्वस्त किया कि कोषागार कर्मियों की ओर से परिषद से घोषित आंन्दोलन में बढ़चढ़ कर भागीदारी की जायेगी। इसके उपरांत परिषद के प्रदेश सलाहाकार दिनेश जोशी ने उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को संबोधित करते हुए बताया कि आंदोलन पूरे प्रदेश में पूर्ण गति से संचालित हो रहा है। सभी कर्मचारियों को इसमें सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
गन्ना पर्यवेक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश डबराल ने कहा कि जन-जागरण अभियान कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी पर आधारित है और सभी साथियों को इसमें सहयोग करना चाहिए। डबराल ने बताया कि परिषद द्वारा पूरे प्रदेश में आंदोलन सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है तथा कर्मचारियों का व्यापक समर्थन प्राप्त हो रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अरुण पांडे ने अपने सम्बोधन में कोषागार संघ को परिषद का अभिन्न अंग बताया। उन्होंने परिषद के मांग पत्र के अतिरिक्त यदि कोई मांग जो कि समस्त कार्मिकों पर लागू हो, उसे संज्ञान में लाने पर परिषद के मांग पत्र में पुनः जोड़ने का आश्वासन दिया। पांडे ने बताया कि आंदोलन पूरे प्रदेश में सफलतापूर्वक चल रहा है। चम्पावत, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल, अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, हरिद्वार, कोटद्वार एवं पौड़ी सहित विभिन्न जनपदों में बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारी आंदोलन में भाग ले रहे हैं। उन्होंने सभी से पूरे मनोयोग से आंदोलन को सफल बनाने की अपील की। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
परिषद की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि कल दिनांक 22 जनवरी 2026 को गेट मीटिंग कार्यक्रम परिवहन आयुक्त कार्यालय सहस्त्रधारा रोड देहरादून एवं उसके आसपास स्थित विभागों में आयोजित किया जाएगा। गेट मीटिंग में कोषागार से करनपाल साई, राहुल कुमार, दिवाकर कोठारी, प्रदीप ध्यानी, शिवम मौर्या, संगीता विष्ट, अंजू विष्ट, हेमा, पवन मखन्वाल, यशपाल विष्ट, भरत सिहं मेवाड, अभिषेक भारद्वाज, दीपक भट्ट, निबन्धक कार्यालय से अनीता जोशी, नरेन्द्र मेहरा, संजीव चौधरी, महिला कल्याण विभाग से भूपेन्द्र सिह तडियाल, हरेन्द्र सिंह लटवाल, प्रदीप पंवार इत्यादि शामिल थे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
आंदोलन की रूपरेखा
1-15 जनवरी से 31 जनवरी 2026 तक विभिन्न विभागों में गेट मीटिंग के माध्यम से मांगों को लेकर जनजागरण अभियान।
2- सात फरवरी 2026 को प्रदेश के प्रत्येक जनपद पर एक दिवसीय धरना एवं जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया जाएगा।
3- 21 फरवरी 2026 को देहरादून में एक दिवसीय प्रदेश स्तरीय धरने का आयोजन किया जाएगा।
4- 22 फरवरी से 12 मार्च 2026 तक अपने अपने क्षेत्रीय विधायकों को कार्मिकों की मांगों से सम्बन्धित ज्ञापन दिया जाएगा।
5- 13 मार्च 2026 को प्रदेश स्तरीय रैली का आयोजन किया जाएगा। साथ ही अनिश्चितकालीन आन्दोलन की घोषणा की जाएगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ये हैं मांग
1- एसीपी के अन्तर्गत 10, 16 एंव 26 वर्ष की सेवा पर पदोन्नत वेतनमान देने के लिए विभिन्न विभागों में तीन पदोन्नति न प्राप्त कर सकने वाले कार्मिकों का संवर्गवार आंकडा वित्त विभाग की ओर से सम्बन्धित विभागों से वर्ष 2023 से पत्राचार किया जा रहा है। इसे लेकर संज्ञान में आया है कि कतिपय विभागों की ओर से तीन वर्ष की समयसीमा पूर्ण होने के उपरान्त भी सूचना उपलब्ध नहीं करायी गयी है। ऐसे विभागाध्यक्षों को चिह्नित करके लापरवाही करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही इस प्रकरण पर शीघ्रातिशीघ्र निर्णय किया जाए। ताकि पात्र कर्मियों को पदोन्नत वेतनमान दिया जा सके।
2- गोल्डन कार्ड के अन्तर्गत ओपीडी में जन औषधि केन्द्रों से कैशलैस दवा एवं सुपरस्पेस्लिसट पंजीकृत चिकित्सालयों में कैशलैस जांच की सुविधा अनुमन्य की जाय।
3- वेतन समिति के सम्मुख विभिन्न संवगों की वेतन विसंगति दूर करने के लिए मजबूत पैरवी की गई थी। दिनांक 12. 8. 2022 की वार्ता को लेकर वेतन समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए। भारत सरकार की ओर से आठवें वेतन आयोग के गठन का निर्णय लिया जा चुका है। उक्त के दृष्टिगत सातवें वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करने के लिए गठित वेतन समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए।
4- पदोन्नति में शीथिलीकरण की अवधि से प्रोवेशन की शर्त को हटाया जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
5- वाहन भत्ता प्रतिमाह 1200 रूपये में बढ़ोत्तरी की मांग परिषद की ओर से की गई थी। इसके आधार पर वाहन भत्ते की दरों में वृद्धि की गई। इस वृद्धि का लाभ 2013 के शासनादेश से वाहन भत्ता प्राप्त कर रहे कार्मिकों को नहीं प्राप्त हो रहा है। परिषद की मांग है कि अपर मुख्य सचिव वित्त की अध्यक्षता में आहूत बैठक में बनी सहमति के अनुसार वंचित कार्मिकों को भी वाहन भत्ते की बढ़ी दरों का लाभ अनुमन्य किया जाए। इसके साथ ही यात्रा भत्ता की दरों में संशोधन के प्रस्ताव को मंत्रीमंडल की आगामी बैठक में स्वीकृत कराया जाए।
6- विभिन्न विभागों के पुर्नगठन एवं सेवा नियमावलीयों में संशोधन के सम्बध में विभाग, शासन एंव वेतन समिति के स्तर पर कार्यवाही लम्बित है। इन्हें प्राथमिकता के आधार पर सम्बन्धित विभागीय संगठनों को विश्वास में लेकर पूर्ण किया जाए।
7- परिषद के संज्ञान में यह भी आया है कि राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा गोल्डन कार्ड धारकों से कैशलेस चिकित्सा के लिए मात्र कटौती की धनराशि से ही भुगतान किया जा रहा है। वहीं, समस्त राज्यकर्मी एवं पेशनर पूर्व की भांति चिकित्सा प्रतिपूर्ति के हकदार हैं। इसलिए चिकित्सा प्रतिपूर्ति एवं चिकित्सालयों के भुगतान के लिए कम पड़ रही धनराशि को सरकार वहन करे।
8- एनपीएस के स्थान पर अन्य राज्यो यथा पंजाब एवं राजस्थान की भांति पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू की जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
9- आठवें वेतन आयोग के सम्बध में भारत सरकार की ओर से अपने अर्द्धशासकीय पत्र के माध्यम से राज्यों से सुझाव आमन्त्रित किये गये हैं। इसे लेकर मांग है कि परिषद को आमन्त्रित कर उसके सुझावों को सम्मलित करते हुए भारत सरकार को राज्य सरकार प्रेषित करें।
10- वर्कचार्ज कर्मियों को उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार अनुमन्य की गई पेंशन एवं ग्रेच्युटी के भुगतान को लेकर आ रही समस्या का शासन व सरकार के स्तर से कार्यवाही कर समस्या का समाधान किया जाए।
11- सेवानिवृत्त कार्मिकों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए बिल आहरण वितरण अधिकारी अथवा संबंधित कोषागार के माध्यम से प्रस्तुत करने की व्यवस्था चिकित्सा विभाग की ओर से जारी शासनादेश में की गई है। वित्त विभाग से शासनादेश जारी न होने के कारण कतिपय कोषागार इस संबंध में आनाकानी कर रहे हैं। अतः इसके लिए वित्त विभाग से भी शासनादेश निर्गत किया जाए।
12- समस्त वर्दीधारियों को पुलिस कर्मियो की भांति सुविधाए अनुमन्य करने की मांग पर शासन स्तर पर कार्यवाही लंबित है। ये मांग पूर्ण कराई जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
13- दिनांक 30 जून एवं 31 दिसम्बर को सेवा निवृत्त होने वाले कार्मिकों को वेतनवृद्धि के लाभ के शासनादेश में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार संशोधन किया जाए।
14- हरियाणा, राजस्थान एवं पंजाब राज्यों की ओर से राशिकरण की कटौती के समय में की गई कमी के दृष्टिगत उत्तराखंड के सेवानिवृत्त एवं सेवारत कार्मिकों के राशिकरण की कटौती पर भी समय में कमी की जाए।
15- राज्य कर्मियों को भी केन्द्र की भांति मकान किराया भत्ता अनुमन्य किया जाए।
16- विभिन्न विभागों में पदोन्नति सेवानियमावली एवं पुर्नगठन के लिए मुख्य सचिव के स्तर पर बैठक आयोजित की जाए।
17- समस्त निगम, निकाय, विश्वविद्यालय, राजकीय विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, अशासकीय विद्यालय सहित अन्य समान प्रकृति के कार्मिकों को राज्य कर्मियों की भांति समस्त सुविधाए अनुमन्य करने का निर्णय शासन स्तर पर किया जाए।
18- आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत कार्मिकों की सेवा बरकरार रखने के लिए संबंधित को निर्देशित किया जाए।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।



