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October 17, 2026

देखें वीडियोः रंगोली ने गौरेया को किया आकर्षित, पहुंच गया बड़ा झुंड, जमकर उड़ाई रंगोली की दावत

रंगोली को अमूमन त्योहारों के मौके पर घर की दहलीज पर सजाया जाता है। होली, दीपावली या फिर अन्य अवसर पर रंगोली सजाना शुभ माना जाता है। रंगोली सजाने के लिए कई लोग रंगों का प्रयोग करते हैं तो कई अनाज के दानों से रंगोली सजाते हैं। आटा, चावल, हल्दी आदि से सजाई गई रंगोली को प्रकृति प्रेमियों की पसंद भी माना जाताहै। अब बात करते हैं पशु और पक्षियों की। सोशल मीडिया पर ज्यादातर यूजर्स पशु-पक्षियों के वीडियोज देखना पसंद करते हैं। इन में कुछ वीडियोज हैरान कर देते हैं, तो कुछ दिल को छू जाते हैं। हाल ही में एक ऐसा ही प्यारा वीडियो सामने आया है। इसमें पक्षियों (गौरेया) का झुंड एक साथ, एक ही जगह पर इकट्ठा होता दिखाई दे रहा है। इस वीडियो में पक्षियों को दाना खिलाने का नया अंदाज तेजी से वायरल हो रहा है, जो लोगों को खूब पसंद आ रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

आपने कई लोगों को सफेद रंग से रंगोली बनाते देखा जाता है। कुछ लोग आटे की, तो कुछ लोग चावल के दानों से भी रंगोली तैयार करते हैं। हाल ही में चावल के आटे से बनी एक रंगोली को देखा जा रहा है, जिसके आसपास पक्षियों का झुंड मजे से उसे खाता नजर आ रहा है। सड़क पर बनाई गई इस रंगोली से आकर्षित होकर गैरेया का झुंड मौके पर पहुंच जाता है। साथ ही पक्षी रंगोली में इस्तेमाल किए गए चावल के आटे की दावत उड़ाते नजर आते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

आमतौर पर कई लोगों को पक्षियों और बेजुबान जीवों को खाना खिलाते देखा जाता है। सोशल मीडिया पर इन दिनों पक्षियों को दाना खिलाने का ये नया अंदाज तेजी से वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर इस वीडियो को सनराइज हैक नाम के पेज पर शेयर किया गया हैय़ वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा गया है कि-रंगोली को बनाने के लिए सफेद पत्थर के पाउडर के बजाय चावल के आटे का उपयोग किया गया है, जिसके चलते पक्षी उसे चुगते देखे जा रहे हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

वीडियो को शेयर करते हुए बताया गया है कि- यह रंगोली भारत में नहीं बल्कि, मलेशिया में बनाई गई है। इस वीडियो को अब तक पांच लाख से ज्यादा यूजर्स लाइक कर चुके हैं। वीडियो को खूब देखा और पसंद किया जा रहा है। इस वीडियो से दो बातें समाने आती हैं। एक तो ये ही कि भारतीय कला विदेशों तक पहुंच गई है। साथ ही इस कला में रंग की बजाय अनाज का उपयोग किया गया है। ताकि प्रकृति और पशु पक्षी प्रेमियों को इससे सुकून मिल सके।

Bhanu Prakash

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भानु बंगवाल
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।