उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों ने किया सचिवालय के समक्ष प्रदर्शन, ये हैं प्रमुख मांग
उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों के चिह्नीकरण की प्रक्रिया को पूरा करने, आंदोलनकारियों के लिए क्षैतिज आरक्षण जल्द से जल्द लागू करने की मांग को लेकर आंदोलनकारियों ने सचिवालय के समक्ष प्रदर्शन किया। हालांकि, सचिवालय से काफी पहले उन्हें पुलिस ने रोक दिया। इस पर आंदोलनकारी सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
ये प्रदर्शन उत्तराखंड आंदोलनकारी मंच के अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी, महासचिव रामलाल खंडूड़ी, प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती, और चिह्नित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय मुख्य संरक्षक धीरेंद्र प्रताप के साझा नेतृत्व में किया गया। इस मौके पर राज्य आंदोलनकारियों ने 10 फीसदी क्षैतिज आरक्षण, आंदोलनकारियों के चिह्नीकरण, पुलिस भर्ती में आंदोलनकारी के चिह्नित बच्चों को नौकरी न दिए जाने के विरोध में नारे लगाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस मौके पर राज्य सरकार से मांग की गई कि वह जल्द से जल्द क्षैतिज आरक्षण को लागू करें। जो लोग चिह्नित हो गए हैं, नौकरियों के लिए चुने गए हैं, उन लोगों को जल्द से जल्द सरकारी नौकरी में समाहित किया जाए। शाम के समय राज्य के गृह सचिव शैलेश बगोली से शासन ने बातचीत का समय दिया। गृह सचिव से वार्ता के लिए आंदोलनकारियों का पांच सदस्य शिष्टमंडल गया। इसमें पूर्व कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप, आंदोलनकारी मंच के प्रदीप कुकरेती, रामलाल खण्डूरी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व सचिव आनंद सिंह राणा शामिल थे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
करीब डेढ़ घंटा गृह सचिव, देहरादून के सिटी मजिस्ट्रेट समेत कई अधिकारियों के साथ आंदोलनकारी नेताओं की वार्ता हुई। बातचीत के बाद गृह सचिव बगोली ने आंदोलनकारियों को आश्वासन दिया कि अभी यह मामला कानून विभाग में परीक्षण के लिए गया हुआ है। जैसे ही वहां से जवाब आएगा, पुलिस में चुने गए आंदोलनकारियों के बच्चे सरकारी नौकरियों में ले लिए जाएंगे। जब तक यह स्थान खाली रखे जाएंगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
चिह्नीकरण के मामले में भी गृह सचिव ने आंदोलनकारियों को आश्वासन दिया कि राज्य के कानून विभाग से पुलिस भर्तियों को लेकर नियमावली के सवाल पर सलाह मांगी गई है। जैसे ही इसे लेकर राय आ जाएगी, कैबिनेट की अनुमति के लिए कैबिनेट की बैठक में प्रकरण को लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि चुने गए बच्चों के लिए सीटे खाली रखी गई हैं और एक भी बच्चे को नौकरी से वंचित नहीं रखा जाएगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
धीरेंद्र प्रताप ने इस मौके पर आंदोलनकारी का पक्ष रखते हुए कहा कि इसके लिए सरकार को टाइम बाऊड प्रोग्राम बनाना चाहिए। तीन महीने पहले ही चिह्नीकरण के मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था। इसके बावजूद एक भी व्यक्ति का चिह्नीकरण नहीं हुआ। प्रदर्शनकारियों में इस मौके पर सुलोचना भट्ट, वीर सिंह लिंगवाल भी प्रदर्शनाकरियों में शामिल थे।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


