लोक संस्कृति को जीवित रखने के लिए अनोखी पहल, वादकों को प्रदान किए पारंपरिक वाद्य यंत्र
उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में वाद्य यंत्रों के वादक काफी दयनीय स्थिति में गुजर रहे हैं। उनके वाद्य यंत्र पुराने हो चके हैं और न ही किसी स्तर से उन्हें मदद नहीं मिलती है। ऐसे में उत्तराखंड के पौड़ी जिले में नैनीडान्डा प्रखंड के ग्राम रणगाव निवासी महिपाल सिंह रावत ऐसे वादकों की मदद को आए गए। उन्होंने एक अनोखी पहल की और वादकों को वाद्य यंत्र प्रदान किए। इस मौके पर लोक कलाकारों (वादकों) को सम्मानित भी किया गया।उनके गाव के दास (औजी) कई पीढ़ियों से गाँव में शादी समारोह, जागर, चूडाकर्म संस्कार आदि अनेक धार्मिक और सामाजिक कार्यों का निष्पादन करते आ रहे हैं। महीपाल सिंह रावत ने आज उन्हें नए वाद्य यंत्र जैसे ढोल, दमाऊ, रणसिघा, मशकबीन आदि भेंटस्वरूप प्रदान किए। इन लोक कलाकारों के वाद्य यंत्र काफी पुराने हो गए थे। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे नए खरीदने की स्थिति में नहीं थे।
ग्राम रणगाव के लोक कलाकार गुणानंद ने भावुक होते हुए अपने मन की बात कही। उन्होंने बताया कि सत्तर साल पहले भी उन्हें महिपाल सिंह रावत के पिता ने निशुल्क वाद्य यंत्र दिए थे। आज दोबारा इस काम को बेटे ने कर दिखाया। महिपाल रावत जेट फ्लीट कम्पनी में बिजनेस हेड हैं। इस मौके पर गांव के सभी पुरुष, महिलाएं उपस्थित थीं।
इस मौके पर महिपाल रावत ने कहा कि वह ऐसे ही 100 वाद्य नए वाद्य यंत्र ढोल, दमाऊ, रणसिघा, मशकबीन आदि किसी भी माध्यम से जरूरतमंद कलाकारों को वितरित करेंगे। ताकि देवभूमि व नैनीडान्डा की लोक संस्कृति जीवित रहे। साथ ही आगे आने वाली पीढियां भी उनका अनुसरण करती रहें। इस अवसर पर कुलदीप सिंह रावत ” पहाड़ों का राही” ने महिपाल रावत की तारीफों के पुल बांधे और कहा कि महिपाल रावत के वंशज शुरू से ही इस कार्य को बखूबी करते आ रहे हैं। उत्तराखंड सरकार को भी इन वाद्य यंत्रो के प्रचार-प्रसार को प्रोत्साहन देते रहना चाहिए। तभी हमारी लोक संस्कृति आगे बढ़ती रहेगी।

रिपोर्ट संकलन
प्रभुपाल सिंह रावत,
सामाजिक कार्यकर्ता, ग्राम नावेतल्ली, रिखणीखाल, जिला पौड़ी गढ़वाल उत्तराखंड।




