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August 1, 2026

यूकेडी नेता दिवाकर भट्ट ने इस दुनिया को कहा अलविदा, लंबे समय से चल रहे थे बीमार

उत्तराखंड राज्य आंदोलन के अग्रणी नेता, उत्तराखंड क्रांति दल के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री दिवाकर भट्ट ने इस दुनिया को अलविदा बोल दिया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। आज शाम करीब साढ़े चार बजे हरिद्वार में तरूण हिमालय स्थित आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

गंभीर रूप से बीमार भट्ट का पिछले कई दिन से महंत इंदिरेश अस्पताल में उपचार चल रहा था। जहां से परिजन आज दोपहर उन्हें हरिद्वार स्थित घर ले गए। घर पहुंचने के कुछ देर बाद ही उन्होंने अंतिम सांस ली। 79 वर्षीय दिवाकर भट्ट 1979 में स्थापित उत्तराखंड क्रांति दल के संस्थापक सदस्य थे। वह 1968 में युवावस्था से ही वे राज्य प्राप्ति आंदोलन के लिए समर्पित हो गए थे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

हरिद्वार बीएचईएल में कर्मचारी नेता के तौर पर सक्रिय रहे भट्ट का वन अधिनियम विरोधी आंदोलन के साथ ही कई सामाजिक राजनीतिक आंदोलन में अहम योगदान रहा। वन अधिनियम विरोधी आंदोलन में वे लंबी जेल भी गए। कीर्तिनगर के पूर्व ब्लॉक प्रमुख दिवाकर भट्ट ने 1995 में श्रीनगर में श्रीयंत्र टापू आंदोलन का नेतृत्व किया। वह स्वयं टिहरी जिले के सबसे ऊंची चोटी खैट पर्वत और बाद में पौड़ी में भी आमरण अनशन पर बैठे। उनके खैट अनशन के बाद केंद्र ने वार्ता का न्योता दिया। उक्रांद के संरक्षक और राज्य आंदोलन के प्रमुख गांधीवादी नेता इंद्रमणि बडोनी ने उन्हें उत्तराखंड के फील्ड मार्शल की उपाधि दी थी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

राज्य स्थापना के बाद साल 2007 में भाजपा, उक्रांद की पहली गठबंधन सरकार में दिवाकर भट्ट राजस्व और आपदा प्रबंधन समेत कई विभागों के कैबिनेट मंत्री रहे। राज्य में खंडूड़ी सरकार के समय आए सख्त भू-कानून के पीछे बतौर राजस्व मंत्री दिवाकर भट्ट की अहम भूमिका रही। परिजनों के अनुसार, स्व. दिवाकर भट्ट के पार्थिव शरीर का कल हरिद्वार में अंतिम संस्कार किया जाएगा। उक्रांद के शीर्ष नेता काशी सिंह ऐरी ने उनके निधन को स्तब्धकारी और यूकेडी व उत्तराखंड के लिए अपूरर्णीय क्षति बताया है।
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