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July 18, 2026

उत्तराखंड में उच्च शिक्षा के प्रति गंभीर नहीं सरकारः डॉ. सुनील अग्रवाल

निजी कॉलेज एसोसिएशन उत्तराखंड के अध्यक्ष डॉ सुनील अग्रवाल ने कहा कि शिक्षा का हब कहे जाने वाले प्रदेश में उच्च शिक्षा के प्रति कोई गंभीर नहीं है। ना ही प्रदेश सरकार और ना ही शिक्षा विभाग इस संदर्भ में कोई चिंता कर रहे हैं। देहरादून में उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने ये बात कही। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने बताया कि राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध निजी कॉलेजों से प्रत्येक वर्ष विश्वविद्यालयों की ओर से संबद्धता शुल्क जमा करवाया जाता है। इसके साथ ही विश्वविद्यालयों की निरीक्षण टीम की ओर से सघन निरीक्षण के उपरांत कॉलेजों की संबद्धता विस्तारण की संस्तुति की जाती है। संस्तुति के उपरांत कॉलेजों के छात्रों के प्रवेश और परीक्षाएं विश्वविद्यालय की ओर से संपन्न करवा ली जाती हैं। इसके बावजूद अधिकांश कॉलेजों को सत्र 2019 से अब तक के श्री देव सुमन विश्वविद्यालय से संबद्धता विस्तारण पत्र प्राप्त नहीं हुए हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि संबद्धता विस्तारण पत्र प्राप्त न होने के कारण छात्रों को छात्रवृत्ति मिलने में समस्या होती है। इसके अतिरिक्त कुछ कॉलेजों को नए कोर्स के लिए समस्त औपचारिकताएं पूर्ण करने के उपरांत भी संबद्धता नहीं दी गई है। इस विषय पर कई बार विश्वविद्यालय के कुलपति से सकारात्मक वार्ता हुई, लेकिन परिणाम कुछ नहीं निकला। यह विषय तत्कालीन उच्च शिक्षा सचिव के समक्ष भी रखा गया था। इस गंभीर विषय पर प्रदेश के शिक्षा मंत्री से भी पूर्व में वार्ता हो चुकी है, लेकिन आश्वासन के पश्चात भी संबद्धता के मसले का हल नहीं हो पाया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

डॉ. सुनील अग्रवाल ने कहा कि जब कॉलेज संचालक विश्वविद्यालयों के अधिकारियों से संबद्धता के संबंध में चर्चा करते हैं तो विश्वविद्यालय के अधिकारी इस विषय पर कहते हैं की फाइलें राजभवन में पेंडिंग है। ऐसे में कॉलेज संचालक राजभवन सचिवालय और विश्वविद्यालय के बीच पेंडुलम के तरह घूमते रहते हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं होता। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए संगठन द्वारा संबद्धता प्रकरण राज्यपाल के समक्ष रखने के लिए संपर्क किया गया, लेकिन कोई परिणाम नहीं मिला। 12 मई को राज्यपाल के ऑफिस में लिखित में मिलने के समय के लिए आवेदन किया गया था, लेकिन राजभवन से राज्यपाल से मिलने के लिए अभी तक कोई संदेश प्राप्त नहीं हुआ। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि इससे जाहिर होता है कि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं राज्यपाल के पास भी इस गंभीर विषय पर चर्चा का समय नहीं है। ऐसे में अगर कभी छात्रों की डिग्री की वैद्यता पर सवाल उठा, तो शासन प्रशासन एवं विश्वविद्यालय सब कॉलेजों को ही दोषी ठहराएंगे। मीडिया भी उनके सुर में सुर मिलाते हुए कॉलेजों में ही कमी तलाशेंगे। इस सबसे जाहिर होता है की शासन प्रशासन के अधिकारियों की उच्च शिक्षा से संबंधित समस्याओं पर छात्रों के हितों के समाधान में कोई रुचि नहीं है। प्रेस वार्ता में संगठन के उपाध्यक्ष प्रदीप जैन, सचिव निशांत थपलियाल, छबील सिंह, कोषाध्यक्ष अजय जसोला, कार्यकारिणी सदस्य सुदेश शर्मा और अनिल तोमर उपस्थित थे।
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