शिक्षक एवं कवि प्रदीप मलासी की कविता-ये अजीब लोग

ये अजीब लोग..
अपनी सुध बुध नहीं इन्हें पर..
ये बदलाव की बातें करते हैं।
ये अजीब लोग..
जमीर की कीमत का अंदाजा नहीं..
इसलिए घूस देने से डरते हैं।
ये अजीब लोग..
लड़ जाते हैं नल खुला रहने पर..
खुली स्ट्रीट लाइट बंद करते हैं।
ये अजीब लोग..
चलते चलते रुक जाते सड़क पर..
उठा कर टूटा कांच किनारे करते हैं।
ये अजीब लोग..
कर्ज तले दबी हो जिंदगी पर..
जरूरतमंदों की मदद करते हैं।
ये अजीब लोग..
कितना समय होता है इन पर..
जो घायल पंछी की पट्टी करते हैं।
ये अजीब लोग..
इनकी कड़ कड़ इनकी बड़ बड़..
लोग कहां गौर करते हैं।
ये अजीब लोग..
कवि का परिचय
नाम-प्रदीप मलासी
शिक्षक, राजकीय प्राथमिक विद्यालय बुरांसिधार घाट, जिला चमोली।
मूल निवासी- श्रीकोट मायापुर चमोली गढ़वाल, उत्तराखंड।

Bhanu Prakash
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भानु बंगवाल
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।



