हम रोशनदान हैं! हम दीवार नहीं रोशनदान हैं। हमसे आती है रोशनी घर में। हमारी भाती है उपस्थिति घर में।...
poetry
ज़िंदगी कंदील हो गई आईनों के शहर में चेहरों पर नक़ाब है। हवाओं को आने की इजाज़त नहीं है। ताका-झांकी...
सियासत की बिछने लगी बिसात। देश को पता तो चली औकात। फूटी आंख न जो कभी सुहाए मिलने लगी उन्हीं...
कई दिनों बाद बारिश हुई मौसम की सफल न साज़िश हुई। कई दिनों बाद बारिश हुई। बरसे बादल ये क्या...
उड़ने से पहले नोंच लिए सारे पंख उड़ने से पहले। खुले आसमां के अब रहे नहीं मायने। सपने तोड़ दिए...
भूख़ के परिंदे भूख़ पेट से खेलती रही, रात भर। देखता रहा रतजगा रोटियों के ख़्वाब। मन मन ही मन...
मेरा देश है भारत भाता है मुझको देश यही, माता है मेरी एक यही। मेरा देश है भारत, मेरा देश...
आज़ाद देश में भूख की न स्याह रात हो। पेट से न मुलाक़ात हो। ग़रीबों की बस्ती में अब भूख...
तो जानूं ग़रीबों के आंसू पी लें, तो जानूं। ग़रीब आज सुख से जी लें, तो जानूं। उनकी राहों में...
मुहब्बत जीत गई। नफ़रत हार गई। प्रेम का सोत कभी सूख नहीं सकता। बरसने से नेह कभी रूक नहीं सकता।...
