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September 17, 2026

poetry

फिर उसने जिंदगी से अलविदा कह दिया होगा फ़ुर्सत के पलों मे बैठकर सोंचती हूँक्यों कोई अपनी जिंदगी से रुख्सत...

मैं सरकस का सिंह रहा सुखमय मम जीवन।मिला किंतु अब बड़ा कठिन ही है यह कानन।।बिना कष्ट था भोजन मिलता...

अपने अंदर छुपा दिया,या जाने कहाँ गुमा दिया,तू वैसा का वैसा फिर मुझको क्यों बदल दिया।दर्पण बता बचपन कहाँ? वो...

सड़क किनारे जिंदगी मूक देखती रह जाएगी खून से सने हाथों से गिरेबाँ पकड़ी जाएगी,सामंती तलवारें नन्हें हाथों में लहराएंगी,गठजोड़ों...

विषय -मंजिल डरते क्यों हो तुम उलझनों सेतुम राह पर चलना तो सीखोदूर नहीं अब कहीं मंजिलतुम ये सोचकर तो...

मध्य हिमालै ? ऊंचा हिवांळों ह्यूं की चादर,रूमझुम बरखा मध्य हिमालै ।धारूं - धारूं बादळ माळा ,ठंडु बथौऊं मध्य हिमालै...

ख्वाहिश मैंने भगवान से मांगी शक्ति,उसने मुझे दी कठिनाइयांहिम्मत बढ़ाने के लिए !मैंने भगवान से मांगी बुद्धि ,उसने मुझे दी...

स्वाचा-स्वाचा, भलु-भलु स्वाचा,भलु सोचिक, भलु - ज्यू ह्वे जांद.बगत - बगत, सोची - सोची क -बित्यूं बगत, कबि याद भि...