अस्तित्व पहाड़ का पानी यहां की जवानी अपने अस्तित्व को लेकर अभी भी तरस रही है क्योंकि- पहाड़ ने कभी...
poetry
पनघट (धारे) मुझको तो मेरे गांव के ही, पनघट (धारे) प्यारे लगते हैं। गर्मी वर्षा आंधी हो या तूफान, अविरल...
पुष्प कहे माली से पुष्प कहे माली सेआज, तेरा मेरा अंत नहीं। टूट भी जाऊं डाली से तो, मेरे जीवन...
हे! माटी हम तेरी संतान बनें तन को पवित्र करने वाली हे! माटी, तुम हमारी माता,हम तुम्हारे पुत्र बनें। तेरे...
देख रही है प्रिय धरा निरंतर ! फाख्ता गौरैया ग्लैडोलिया, गेंदा गुड़हल गुलदाऊदी। हरित क्षेत्र सम्मुख सुरपर्वत, पुष्प पर्ण सुरभित...
मैं सड़क हूं मैं सड़क हूं,कई बार बनती, कई बार टूटती। मैंने तुम्हें अपनों से जोड़ा, लेकिन क्यों लोगों ने,...
पथ पर चलता जा हे पथिक! तू निर्भय होकर पथ पर अपने बढ़ता चल। राहों में कर रहीं इन्तजार ठोकरें...
परिंदों का आशियाना मेरे मृदुल वन में जब, परिंदों की गुंजन होती है। हृदय खुश हो जाता तब, उनकी जब...
न निकले आंसू बेवजह आज दूरियां बनी है दिलों में, देख रहा मैं चारों ओर से। मैं तो बंधा रहूंगा...
बीती यादें कुछ यादें छोड़ पीछे, ये दौर भी गुजर जाएगा। शायद यकीन है मुझे, फिर से जहान मुस्कुराएगा।। दुखी...
