लोगों को सिर्फ क्यों दिखती है शहर की चहल पहल, शानों-शौक़त क्यों किसी को नही दिखती वो कूड़ा बिनती लाचार...
poetry
घनन घन घन मेघ बरसे बन संवर कर बिजली चमके आगे पीछे हवा चलती दरवाज़े खिड़कियां भी खनके। घनन..................... बादलों...
वसुन्धरा वसुन्धरा की जलधारा से सारी धरती सजती है कहीं नदियां कहीं तालाब कहीं जलप्रपात घिरते है। सुन्दर वन...
आज के हालात.. मक़्कारी आती नहीं हमें रास बड़े बड़े मिले मुझे सलाहकार और उनके हर कदम हैं मेरे खिलाफ...
श्राद्ध पक्ष श्राद्ध पक्ष लगा आज से पित्रदेव धरती पर आये अपने घर-घर आकर वो सबको आशीष दे जाते। पूर्णिमा...
मां सरस्वती हे मां सरस्वती, तू प्रज्ञामयी मां चित्त में शुचिता भरो, कर्म में सत्कर्म दो बुद्धि में विवेक दो...
भ्रमित मत करो जनता को भ्रमित अपने झूठे वादो को करने से करेंगे काम तुम्हारे लिए सब झूठ वह...
मानव मर्यादा चरित्र अपना देखो किस ओर ढ़ल रहा है । मलिनता लिए उर किस ओर बढ़ रहा है तुम...
बालिकाये सरल हृदय की होती है बालिका सरस्वती की वाणी होती है, बालिका ही दुर्गा कल्याणी होती है। बालिका को...
कवि सम्मलेन एक दिन मैं बैंठी बैठी क कवि सम्मेलन का बारा म सोचण लग्यूं मैं कबि कवि सम्मेलन म...
