उठा-पोड़ सरा राती- उठा-पोड़ म, जरा बि निंद नि ऐ. ज्यू-ज्यान बचांणां-दौड़ म, जरा बि निंद नि ऐ.. यो क्यांकु...
Literature
जोंक रोपनी जब करते हैं कर्षित किसान, तब रक्त चूसते हैं जोंक! चूहे फसल नहीं चरते फसल चरते हैं साँड...
आश को उमाळ छ। फिर ऐगी सू कोरोना, तेज तैकी चाल छ। फिर घरों म कैद दुनिया,दुखी छ बेहाल छ।...
क्या हम स्कूल जा पाएंगे सोचा न था जीवन में, ऐसे दिन भी आयेंगे। कारण कोरोना के हम, घर पर...
श्रृंगार की बेड़ियाँ आभूषण, बनाव, श्रृंगार, सौंदर्य की बेड़ियों में जकड़ी करती मिथ्या परम्परा में विहार स्त्री! क्या तुम्हें दुःख...
कुल्हड़ की चाय की चुस्कियां माटी से जुड़ा रखती है। दुनिया के बदलते तौर तरीकों में भी उस कुम्हार की...
कनु-बिज़ोग कख- कख बटि कख- तक लेखण, स्वाचा. बनि- बनी दुन्या कख- तक देखण, स्वाचा.. ब्वना कु मन्खी-दूर तक पौंछ,...
प्रेम मेरा प्रेम संगीत मंदिरों में गुंजते पवित्र मंत्रोचारण और घण्टियों की ध्वनियों के साथ हर दिशाओं में गुंज रही...
पत्थर की अभिलाषा चाह नहीं नव निर्माण के.. शिलान्यास में रखा जाऊं! चाह नहीं देवालय में रख कर.. हरि संग...
गूँज उठी रणभेरी काशी कब से खड़ी पुकार रही पत्रकार निज कर में कलम पकड़ो गंगा की आवाज़ हुई स्वच्छ...
