बुलंदी संस्था की ओर से हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत चमोली जिले के गोपेश्वर में सुभाष चौक के निकट प्रतीक्षालय में...
Literature
जूगनूं नहीं डरता मैं अंधेरे से मैं तो प्रकाश देता सबको एक छोटा-सा उजाला देकर मैं राह दिखाता हूं सबको...
अपणु-बिरणु इनुबि क्या, अपड़ौं से- दूर ह्वे जावा. दुन्यदरी ईं भीड़ म, कखि ख्वे जावा.. ऑसु बि वख अंदी, जख...
सौंण-भादौं बरखण लग्यूछ सौंण-भादौं डांडी कांठी हरी भरी ह्वैगी । गदरा गाड़ सबी बढ़ी गैंन छ्वैला पाणी फूटीगिन घर गुठ्यारियूम...
हिमालै दिवस बंदन-अभिनंदन तेरु, मुंड-झुकांदी हिमालै. भू- मंडल म अकेलू, राज- चलांदी हिमालै.. साक्यूं बटि खणु रैकि, हमरि रक्षा करि...
पंदेरा-नवळा पंदेरा बड़िगीं गदेरा, नवळा सूखि गींन. नलौं कु भरोसु कनम कन, टूटि गींन.. गौं-गौं घर-घरौं, पांणी रूणु ह्वेगे आज,...
श्रृंगार कर्याल उठ दै मेरू लाड़ू मुख हाथ ध्वैयाल सैसर त्वैन जाती श्रृंगार कर्याल। उठ दै.......................... माथा म बिंदिया सिन्दूर...
बढत-घटत एक बग्त छौ, सबि कुछ- बढदि ग्याई. इनु बि बग्त ऐ, सबि कुछ- घटदि ग्याई.. पैल्याकु समै, खेति- औलाद...
दहेज मां- बाप देते हैं हमें दूसरों के घर भेज सास ससुर भी कहे क्या लायी तू दहेज क्यों लगते...
ठंडु-मिठु बतौ- इनि बि, क्यांकि उठा-पोड़ ह्वे जांद. बात- पीछा, क्यांकि दौड़ा- दोड़ ह्वे जांद.. सै- पे- कि क्वी काम,...
