जब भी मैं कहीं बाहर जाने के लिए बस या ट्रेन का सफर करता हूं, तो जेबकतरों से सावधान रहता...
Literature
अपनी सहूलियत के हिसाब से हर शख्स अपना किरदार रखता है.. उड़ते परिंदो के लिए कोई बंदूक तो कोई पानी...
बचपन में सबसे आसान खेल मुझे कुर्सी दौड का खेल लगता था। इस खेल में गोलाई पर कई कुर्सियां लगी...
धर्म व नैतिक शिक्षा देने वाले हमेशा काम, क्रोध, लोभ, मोह, द्वेष आदि को इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन बताते...
बात करीब वर्ष 1975 की है। तब सिनेमा हॉल में जय मां संतोषी पिक्चर लगी। तब देहरादून में टेलीविजन नहीं...
इक रोज़ हम अनहद याद आयेंगे तुमको किसी रोज़ गीतों की तरह गुनगुनाएँगे तुमको। हाल अपने दिल का सुनाएँगे तुमको।।...
देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है। पेट्रोल, सब्जी, राशन-पानी के दाम लगातार बढ़ रहै हैं। अब तो दाम बढ़ना...
जीवन सुमन जीवन सुंदर फूलों जैसा गुणों की इसमें सुगंध होती है। मन को अपने निर्मल रखना अच्छे लोगों से...
सच ही कहा जाए किसी भी फील्ड में कितनी भी महारथ हासिल कर लो, लेकिन आपका नाम नहीं, तो कोई...
मंजिल पाने के लिए, खुद ही चलना पड़ता है रास्तों पर मंजिल की तरफ रास्ते खुद, चलते हैं क्या! खुद...
