गंगा गंगा के घाट पर बैठकर गंगा को निहारते हुए बीत जाता है समय जल्दी जल्दी गंगा की गहराई जितनी...
Literature
सरकार क्या, ये भी कोई सरकार है। मुद्दों पर सोई सरकार है। मुहब्बत के देश में नफ़रतें, ये अब तक...
मुझे मेरे हिस्से का आसमान चाहिए। थोड़ी सी जमीं नहीं पूरा जहान चाहिए॥ विश्वाआरा लोपामुद्रा, गार्गी अपाला, विद्योत्तमा की वंशज,...
देश पूरा चरना जुलूस, रैली, प्रदर्शन, धरना। मांगें हमारी मानो वरना ? देश हितों से हमें क्या लेना, हमें तो...
अर्धरात्रि है, काली स्लेट सी छटाएं मदमाती हुई नृत्य करती जैसे कुछ सिसकियां सी आवाज़ कभी तेज... कभी मद्धम... गुर्राते...
हुई बेईमानों की हार। विजयी हुआ कुलदीप कुमार। मुंह दिखाने लायक वे रहे न पड़ी ऐसी न्याय की मार। आगे...
आजकल की बहुतेरे लड़कियाँ भूली हुई है अपनी धारा पे चलना...! घर के पिंजरों से बाहर तलाश रही है अपनी...
आदमी परेशान है। काग़ज़ों में अमीर है। आज भी जो फ़कीर है। खलिहान में न धान है। आज रहा न...
मां सरस्वती के आगमन पर, सजने लगी धरती सारी। खिलने लगे फूल रंग बिरंगे, वन, उपवन, खेतों में बारी-बारी।। मधुमास...
मधुमास का आना हुआ। मौसम भी सुहाना हुआ। काला - कलुटा भंवरा भी कलियों का दीवाना हुआ। गुलशन का पत्ता...
