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June 28, 2026

Literature

ए-वक़्त ख़ुद पर इतना ग़ुरूर न कर तू वक़्त ही तो है, वक़्त तू भी वक़्त एक वक़्त पर बदल...

बल...बूबू धादधधयाय... आमा भात पकायो छ....बल अच्हारे आमा भात पकायो छ।।टेक।। बूबू धाद धधयाय... आमा भात पकायो छ।।टेक।। बल बूबू...

ब्यटलौं क भोऽर चल़णू , हमरु घर- संसार च. ब्यटलौं मीलु ऊं कु अधिकार, आज दरकार च.. ब्यटलौं न दे-लाड-प्यार,...

नारी है परी-जैसी, स्त्री प्रेम की धारा है। सेहरा-से जीवन में, नारी ही सहारा है।। आलम में अँधेरा है, भटकाव...

पहाड़ी गीतमाला फाल्गुनी फुहार को लोकगीतों का संग्रह भी कहा जा सकता है। इनमें कुछ गीत को लेखक की ओर...