इस जीवन की कड़वी सच्चाई मौत भी है। जब एक बार कोई इस धरती पर आता है, तो उसका जाना...
साहित्य
जीते जागते सोचो तो ख्वाब। नींद में देखो तो सपना। सच ही है कि ख्वाब में व्यक्ति का अपना जोर...
सच ही कहा जाता है कि सत्ता की धमक में नेताजी का अंदाज बदल जाता है। पहले तक लोगों के...
म्येरा भाई... किस्मतौ लेख्यौ कस्यां, फेरना म्येरा भाई... ज्युदी परानि हंसि, खेल्ना म्येरा भाई... किस्मत खेल, देखूनै म्येरा भाई.... किस्मत...
समाज ने सहर्ष स्वीकारा समाज ने सहर्ष स्वीकारा है, निरक्षर स्त्री को मगर नही स्वीकार कर पाया, पुरुषों से ज्यादा...
इस गांवों में अब तो चिड़ियों ने भी चहचहाना छोड़ दिया। पहले कभी चिड़ियों की चहचहाट से सुबह होती थी...
बचपन में जब भी देहरादून से पिताजी के साथ मसूरी जाता, तो पैदल यात्रा करनी पड़ती थी। तब शहनशाही आश्रम...
बारह साल की उम्र में जब मुझे साइकिल मिली तो मुझ पर घर के छोटे-छोटे काम की जिम्मेदारी भी आ...
जब मैं करीब पांच साल का था। तब बड़े भाई को साइकिल मिली और चोरी भी हो गई। इसके बाद...
समय समय यूँ ही बीत रहा है दिन यूँ ही गुजर रहा है। मंजिल का कुछ पता नहीं है साँसें...
