नाटक सुन चेतुआ ना रार कर... नाटक ना बार बार कर... सुंदर शब्दों का संचय कर नित जीवन अपना उदय...
ललित मोहन गहतोड़ी
सुन चेतुआ ओ चेतुआ... सुन चेतुआ, सुन सुनैतू गुन चेतुआ... सुन चेतुआ सुनिले बाबू, मुख मुखैको ज्ञान चेतुआ... देख चेतुआ...
ख़बरें खासकर वह बासी खबरें... बासी नहीं तिबासी खबरें... होती सब बकबासी खबरें... करती बहुत उदासी खबरें... लद गये दिन...
होली खेली द्यूला हो... तुम लड़िया झन हो... तुम लड़िया झन नत होली खेली द्यूला हो।।टेक।। तुम तो लड़ाकू बड़े...
गं गं गणपति देवा.... जय गणपति महराज... गं गं गणपति देवा।।टेक।। सिद्ध करो महराज.... गं गं गणपति देवा।।टेक।। राखिय सबकी...
तू अड़ि मड़ि ऐसी तसि झन कीजै.... तेरी बक बकवास कि कूछै दिन रात तू अड़ि मड़ि ऐसी तसि झन...
तू लगती जैसे दिलजानी... अनूजा तेरि सूरत भलि स्वानी अनूजा तेरि सूरत भलि स्वानी तू लगती जैसे दिलजानी अनूजा तेरी...
ली बेर फाच्ची... ली बेर फाच्ची भरी प्यार, नीली आंखों भरि दुलार। जादूनगरी को मेरो, रंगीलो श्याम सुंदर। वीकि दीवानी...
धन्य धन्य तेरो भाग्य सिरतोली तेरी महिमा सबमें न्यारी छै पूरव में कुकड़ी कोट बसत है।।२।। पश्चिम में पत्थर कोट......
भाज कोरोना भाज.... भाज कोरोना भाज कोरोना भाज कोरोना भाज तेरी ऐसि तसि कोरोना भाज कोरोना भाज तेरो बीमारि कोरोना...
