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May 19, 2026

साहित्य

वैसे तो मां की किसी भी आदत व व्यवहार की बराबरी कोई नहीं कर सकता। मां हो या नानी हो...

एक मां वह होती है, जो बच्चे को जन्म देती है, लेकिन उसका लालन पालन नहीं करती। वहीं, एक मां...

अपनी सहूलियत के हिसाब से हर शख्स अपना किरदार रखता है.. उड़ते परिंदो के लिए कोई बंदूक तो कोई पानी...

बचपन में सबसे आसान खेल मुझे कुर्सी दौड का खेल लगता था। इस खेल में गोलाई पर कई कुर्सियां लगी...

धर्म व नैतिक शिक्षा देने वाले हमेशा काम, क्रोध, लोभ, मोह, द्वेष आदि को इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन बताते...

बात करीब वर्ष 1975 की है। तब सिनेमा हॉल में जय मां संतोषी पिक्चर लगी। तब देहरादून में टेलीविजन नहीं...

इक रोज़ हम अनहद याद आयेंगे तुमको किसी रोज़ गीतों की तरह गुनगुनाएँगे तुमको। हाल अपने दिल का सुनाएँगे तुमको।।...