औकात सुबह उठी इक तितली मचली पर खोल देख निज रंगों को फूलों फूलों पर है इतराती कलियों को ताना...
साहित्य
वैसे तो मां की किसी भी आदत व व्यवहार की बराबरी कोई नहीं कर सकता। मां हो या नानी हो...
एक मां वह होती है, जो बच्चे को जन्म देती है, लेकिन उसका लालन पालन नहीं करती। वहीं, एक मां...
जब भी मैं कहीं बाहर जाने के लिए बस या ट्रेन का सफर करता हूं, तो जेबकतरों से सावधान रहता...
अपनी सहूलियत के हिसाब से हर शख्स अपना किरदार रखता है.. उड़ते परिंदो के लिए कोई बंदूक तो कोई पानी...
बचपन में सबसे आसान खेल मुझे कुर्सी दौड का खेल लगता था। इस खेल में गोलाई पर कई कुर्सियां लगी...
धर्म व नैतिक शिक्षा देने वाले हमेशा काम, क्रोध, लोभ, मोह, द्वेष आदि को इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन बताते...
बात करीब वर्ष 1975 की है। तब सिनेमा हॉल में जय मां संतोषी पिक्चर लगी। तब देहरादून में टेलीविजन नहीं...
इक रोज़ हम अनहद याद आयेंगे तुमको किसी रोज़ गीतों की तरह गुनगुनाएँगे तुमको। हाल अपने दिल का सुनाएँगे तुमको।।...
देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है। पेट्रोल, सब्जी, राशन-पानी के दाम लगातार बढ़ रहै हैं। अब तो दाम बढ़ना...
