श्रीदेव सुमन का बलिदान दिवस, लोगों के जीवन को बचाने का प्रयास, किया रक्तदान
टिहरी राजशाही के खिलाफ आंदोलन करने के लिए जेल में बंद श्रीदेव सुमन ने 25 जुलाई 1944 को बलिदान दिया था। उनकी याद में उत्तराखंड में विभिन्न संगठनओं की ओर से श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। वहीं, देहरादून में श्री विश्वनाथ जगदीशिला तीर्थाटन समिति ने दून रेडक्रॉस सोसाइटी के सहयोग से दून अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्तदान किया। इस मौके पर कुल 31 यूनिट रक्त एकत्र किया गया। बलिदान दिवस के दिन रक्तदान कर किसी जरूरतमंद मरीज का जीवन बचाने का ये प्रसास सराहनीय है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
इस अवसर पर विश्वनाथ जगदीशिला तीर्थटन समिति के संरक्षक एवं पूर्व मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने कहा कि पूरे प्रदेश में आयोजित रक्तदान शिविर में सभी ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। समिति ने अपने रजत जयंती वर्ष में 11 सूत्रीय संकल्प में इस कार्यक्रम को शामिल किया था। साथ ही वृक्षारोपण, नशा मुक्ति, बंजर भूमि उपजाऊ, संस्कृत भाषा का संवर्धन, देव संस्कृति बचाओ आदि कार्यक्रम इसमें शामिल हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
शहीद श्रीदेव सुमन के भतीजे पंडित राजीव नयन बडोनी ने इस अवसर पर कहा कि समिति ने इस पुनीत कार्य को करके महान बलिदानी को सच्ची श्रद्धांजलि प्रदान की। श्रीदेव सुमन संस्था के डॉ. मुनिराम सकलानी ने भी इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि श्री विश्वनाथ जगदीशिला तीर्थाटन समिति ने अपनी सार्थकता सिद्ध की है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
रेडक्रॉस सोसाइटी के प्रदेश कोषाध्यक्ष मोहन खत्री, जिला चेयरमैन डॉ. एम.एम. अंसारी, पुष्पा भल्ला, प्रदीप कुकरेती, अमन शर्मा, राजीव बागड़ी, केशव उनियाल, इंद्र भूषण बडोनी, अकबर सिंह नेगी, विवेक सूरी, कैलाशपति मैठाणी, विजय प्रताप मल्ल, आशीष उनियाल, देवेश राणा, हर्षमणि कंसवाल, बिजेंद्र सिंह, अमर शर्मा, भारत भूषण बडोनी, विजयेश नवानी आदि ने कार्यक्रम में सहभागिता निभाई। खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
जेल में बंद सुमन ने किया था अनशन
टिहरी राजशाही के क्रूरतम जुल्म के खिलाफ अपना बलिदान दिया। अमर शहीद श्रीदेव सुमन को राजद्रोह के आरोप के चलते टिहरी राजशाही ने कैद डाल दिया था। वह अपनी मृत्यु तक 208 दिन जेल में रहे। राजशाही का क्रूरतम अत्याचार भी उनको विचलित नहीं कर पाया। राजशाही से जनता की न्यायोचित मांगों के लिये सुमन अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे। जहां उन्होंने 84वें 25 जुलाई 1944 को दुनिया को सदा सदा के लिये अलविदा कह दिया।
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