श्रद्धालुओं की भावनाओं से खिलवाड़, अब सरकार बताएगी कि साल में एक बार करने हैं भगवान के दर्शनः लालचंद शर्मा
उत्तराखंड में चारधाम यात्रियों के लिए साल में एक बार दर्शन की व्यवस्था पर देहरादून महानगर कांग्रेस अध्यक्ष लालचंद शर्मा ने प्रदेश सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि पर्यटन मंत्री के इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को दिए गए निर्देश उत्तराखंड को देश और विदेश में बदनाम करने वाला कदम है। ऐसी किसी भी योजना को सरकार को लागू नहीं किया जाना चाहिए। भगवान के दर्शन के लिए तीर्थ स्थल जाने के लिए किसी भी नियमों से बांधना उचित नहीं है। भक्त की जब भी इच्छा होगी तो वह धाम में दर्शन के लिए जाएगा। ऐसा होता आया है, होता रहेगा और भविष्य में भी होना चाहिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)एक बयान में महानगर कांग्रेस अध्यक्ष लालचंद शर्मा ने कहा कि हाल ही में उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद की बैठक में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा था कि चारधाम यात्रा को क्षमता के अनुसार संचालित करने के लिए एक तीर्थयात्री को साल में एक बार ही चारधाम जाने की अनुमति दी जाए। इसके लिए चारधाम यात्रा के लिए पंजीकरण की सुविधा को आधार कार्ड से जोड़ा जाए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने की बात कर रही है। चारधामों में सुविधाओं की बात कर रही है। केदारनाथ धाम में रोपवे की बात कर रही है। चारधाम यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए लिम्का रिकॉर्ड गिनीज बुक में यात्रियों की संख्या दर्ज कराने की बात कर रही है। भारतीय और विदेशी पर्यटकों को आमंत्रित कर रही है। वहीं, इसके उलट यात्रा करने वालों पर अंकुश लगाने की बात की जा रही है। शायद दुनिया में ऐसा कोई भी धार्मिक स्थल होगा, जिसमें एक व्यक्ति को एस साल में एक बार ही दर्शन की अनुमति हो। ऐसी उटपटांग व्यवस्थाओं से लोगों में यात्राओं के प्रति उत्साह कम होगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि भगवान के दर्शन के लिए व्यक्ति की इच्छा होती है। ना कि उसे किसी तरह से बाध्यकारी बनाया जा सकता है। एक तरफ सरकार बात बात पर वाहवाही लूट रही है। वहीं, सरकार के मंत्री इस तरह की व्यवस्था कर देश और विदेश के यात्रियों को क्या संदेश देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अब चारधाम के कपाट बंद होने को हैं। यानि यात्रा का समापन हो जाएगा। इसके बाद शीतकालीन चारधाम यात्रा आरंभ होगी। इस दौरान भगवान के शीतकालीन प्रवास वाले स्थानों तक श्रद्धालु जाएंगे। ऐसे में सरकार को चाहिए कि सर्दियों के अनुरूप सारे ऐसे धार्मिक स्थलों में व्यवस्थाएं बेहतर की जाएं।

Bhanu Prakash
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भानु बंगवाल
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


