पेगासस जासूसी प्रकरणः सरकार ने हाथ खींचे तो सुप्रीम कोर्ट हुआ सख्त, गठित करेगा जांच के लिए एक्सपर्ट कमेटी
पेगासस जासूसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो मामले की जांच के लिए एक्सपर्ट कमेटी का गठन करेगा। अगले हफ्ते आदेश जारी होगा।
पेगासस जासूसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो मामले की जांच के लिए एक्सपर्ट कमेटी का गठन करेगा। अगले हफ्ते आदेश जारी होगा। सीजेआई ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि हम इसी हफ्ते आदेश जारी करना चाहते थे। वो एक्सपर्ट कमेटी बना रहे हैं, लेकिन कुछ सदस्यों ने निजी कारणों से शामिल होने से इनकार कर दिया है, इसलिए मामले में देरी हो रही है। सीजेआई एनवी रमना ने ये बात वरिष्ठ वकील सीयू सिंह से कही। सीयू सिंह पेगासस मामले में भी याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हो रहे हैं। इस मामले में 13 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। इसमें 12 याचिकाओं पर फैसला आएगा।केंद्र सरकार ने जनहित और राष्ट्र की सुरक्षा का हवाला दे विस्तृत हलफनामा दाखिल करने से इनकार किया था। वकील एमएल शर्मा, माकपा सांसद जॉन ब्रिटास, पत्रकार एन राम, पूर्व आईआईएम प्रोफेसर जगदीप चोककर, नरेंद्र मिश्रा, परंजॉय गुहा ठाकुरता, रूपेश कुमार सिंह, एसएनएम आब्दी, पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा और एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया की याचिकाएं हैं। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार इस मुद्दे को सनसनीखेज बनाने का जोखिम नहीं उठा सकती। नागरिकों की निजता की रक्षा करना भी सरकार की प्राथमिकता है, लेकिन साथ ही सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को बाधित नहीं कर सकती। ऐसी सब तकनीक खतरनाक होती हैं। इंटरसेप्शन किसी तरह गैर कानूनी नहीं है। इन सबकी जांच एक विशेषण समिति से कराने दें। इन डोमेन विशेषज्ञों का सरकार से कोई संबंध नहीं होगा। उनकी रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट के पास आएगी। केंद्र ने कहा कि हम हलफनामे के जरिए ये जानकारी सार्वजनिक नहीं कर सकते। अगर मैं कहूं कि मैं किसी विशेष सॉफ्टवेयर का उपयोग नहीं रहा हूं या इसका उपयोग नहीं कर रहा हूं तो यह आतंकवादी तत्वों को तकनीक का काट लाने का मौका देगा। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस मुद्दे पर केंद्र सरकार से नाराजगी जताई।
CJI रमना ने कहा कि आप बार-बार उसी बात पर वापस जा रहे हैं। हम जानना चाहते हैं कि सरकार क्या कर रही है। हम राष्ट्रीय हित के मुद्दों में नहीं जा रहे हैं। हमारी सीमित चिंता लोगों के के बारे में है। समिति की नियुक्ति कोई मुद्दा नहीं है। हलफनामे का उद्देश्य यह होना चाहिए ताकि पता चले कि आप कहां खड़े हैं। संसद में आपके अपने आईटी मंत्री के बयान के अनुसार कि फोन का तकनीकी विश्लेषण किए बिना आकलन करना मुश्किल है।
सीजेआइ ने 2019 में तत्कालीन आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद के बयान का हवाला दिया। उसमें भारत के कुछ नागरिकों की जासूसी का अंदेशा जताया गया था। मेहता ने वर्तमान आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के संसद में दिए बयान का हवाला दिया। सरकार ने किसी भी तरह की जासूसी का खंडन किया है। सीजेआई ने आगे कहा कि हमने केंद्र को हलफनामे के लिए बार-बार मौका दिया। अब हमारे पास आदेश जारी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। समिति नियुक्त करना या जांच करना यहां सवाल नहीं है, अगर आप हलफनामा दाखिल करते हैं तो हमे पता चलेगा कि आपका स्टैंड क्या है।
याचिकाकर्ता एन राम के लिए कपिल सिब्बल ने कहा कि ये सरकार की जिम्मेदारी है कि वो जवाब दें। नागरिकों की निजता का संरक्षण करने सरकार का कर्तव्य है। स्पाइवेयर पूरी तरह अवैध है। अगर सरकार अब कहती है कि हलफनामा दाखिल नहीं करेगी तो माना जाना चाहिए कि पेगासस का अवैध इस्तेमाल हो रहा है। इससे पहले सुनवाई में केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि इस संबंध में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने पर विचार किया जा रहा है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।




