बीजेपी के घोषणापत्र पर विपक्ष का तंज, कांग्रेस ने कहा खानापूर्ति, यूकेडी ने बताया दृष्टिपत्र में दृष्टि गायब
उत्तराखंड में बीजेपी के दृष्टिपत्र के रूप में पेश घोषणापत्र को लेकर विपक्ष ने कड़ा तंज कसा। कांग्रेस ने इसे महज खानापूर्ति बताया। वहीं, यूकेडी ने कहा कि बीजेपी के दृष्टिपत्र में दृष्टि ही गायब है। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष व सलाहकार सुरेंद्र कुमार ने भाजपा के घोषणापत्र पर जम कर कटाक्ष किया। कहा बहुत शोर सुनते थे। ये तो कांग्रेस के घोषणा पत्र की छाया तक भी नही पहुंच पाए हैं। लगता है मतदान से पांच दिन पूर्व कांग्रेस के दबाव में खानापूर्ति कर रस्म अदाएगी की गई है।उन्होंने कहा कि पिछले 2017 रखे गए लोकायुक्त व आर्थिक स्थिति को लेकर श्वेत पत्र की घोषणा को इस बार तो डर के कारण बीजेपी रख ही नहीं पाई। क्योंकि बीजेपी ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को तो चौपट कर दिया। लोकायुक्त को अपने नेताओं के किए गये भ्रष्टाचार से बचाने को इस बार नही रखा है। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी केंद्रीय नेता चुनाव में किया गए वादों को स्वयं जुमले बताते हो, उनके दृष्टि पत्र में भी जुमले ही हैं। खेती किसानी के लिए अपनी ज़िम्मेदारी से पार्टी बचती नज़र आइ। ना ही युवाओं को रोज़गार , छोटे व्यापारियों व जनता को महंगाई से राहत के लिए दृष्टि भी गायब है। उन्होंने कहा कि भाजापा का अपना रिकार्ड अपनी घोषणाओं का पालन करने में बहुत खराब है। पाँच वर्ष का भाजापा का केंद्र व राज्य का कार्यकाल निराशजनक व असफलताओं का रहा है। दृष्टि पत्र ने भी जनता को निराश ही किया होगा।
भाजपा के दृष्टिपत्र में नहीं है कोई विजन
यूकेडी के केंद्रीय प्रवक्ता विजय बौड़ाई ने कहा कि उत्तराखंड भाजपा के दृष्टिपत्र में दृष्टि गायब हो गयी है। इसमें मात्र नकद पैसा बांटने तथा जनता को पैसा देकर लुभाने के अलावा कोई विजन नही है। बेरोजगारी दूर करने की कोई ठोस कार्ययोजना नही है। पिछले कार्यकाल मे 13 टूरिज्म स्पॉट बनाने की बात करने पर एक स्पॉट नही बनाया और अब 45 सपाट बनाने की बात करना एकदम झूठ फैलाना है। शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर कोई विजन नही हैं। पिछली बार स्मार्ट सिटी की बात की, जो नही बनी। अब स्मार्ट विलेज की बात का कोई मायना नहीं है।

उत्तराखंड की आर्थिकी मजबूत करने, उद्यान को बढ़ाने, कृषि एवं कृषि आधारित क्षेत्रों के विकास, पर्वतीय क्षेत्रों में उधोगों को बढ़ाने के लिए कुछ नही है। राज्य की स्थायी राजधानी गैरसैंण की कोई बात न करना दुर्भाग्यपूर्ण है। भूक़ानून को नष्ट कर सख्त भूक़ानून की बात करना जनता के साथ धोखा है। इस प्रकार सम्पूर्णता में देंखें तो भाजपा के पास उत्तराखंड का कोई विजन नही है। फ्री पैसा बांटने की बात कहकर उत्तराखंड की जनता को अकर्मण्य बनाने का गलत कार्य किया जा रहा है। इसमें विकास का कोई खाका नही खींचा गया। यहां गुजरात मांडल, दिल्ली मांडल सब फेल हो गए हैं। उत्तराखंड में केवल उत्तराखंड मांडल चलेगा, जो कि केवल उक्रांद के पास है।



