ललित मोहन गहतोड़ी की कुमाऊंनी कविता- दुखड़ा कभै मेरा
दुखड़ा कभै मेरा
दुखड़ा कभै मेरा कोई नै सुनैना
द्वी बीसी पुरि है गई नै कोई बैऊना
ईजु बौज्यु बुड़ा धिना कां पनै ऊ जानि
दाजु भौजी पल्टना कां देली हेरनि
रै गई बिन बेवायूं को मैं गों पधान
दुखड़ा कभै मेरा कोई नै सुनैना
कभै जबै मन भितरि आवकोठा पड़नि
दुखि मन खोजनि घर भ्यार भितरनि
नै देखी कसो हुछ फिरी लै तेरो भान
दुखड़ा मेरा कभै कोई नै सुनैना (कविता जारी, अगले पैरे में देखिए)
मन मेरो उदास के मैं नै लागदैनि
गल सुखी भुख प्यास आब नै मैं सतुनि
रूखी सूखी खाई पीई रात कटि जानि
दुखड़ा मेरा कभै कोई नै सुनैना
घर देली सबका छन छन पायल बाजनि
मेरा घरै देलि भांगि राह तेरो ताकनि
कब आलि मेरि उम्मीदैकि तू परान
दुखड़ा मेरा कभै कोई नै सुनैना
रचनाकार का परिचय
रचनाकार ललित मोहन गहतोड़ी काली कुमाऊं चंपावत से प्रकाशित होने वाली वार्षिक सांस्कृतिक पुस्तक फुहारें के संपादक हैं। वह जगदंबा कालोनी, चांदमारी लोहाघाट जिला चंपावत, उत्तराखंड निवासी हैं।
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Bhanu Bangwal
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मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।


