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October 16, 2026

उत्तराखंड में विधायकों के बीच से सीएम चुना जाना संभव, दो केंद्रीय मंत्री को बनाया गया पर्यवेक्षक

सूत्र तो यही बता रहे हैं कि उत्तराखंड में विधायकों में से ही किसी को मुख्यमंत्री बनाने को लेकर फैसला लिया जाएगा। इसके लिए वहीं केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और धर्मेंद्र प्रधान उत्तराखंड आएंगे। इन नेताओं को पर्यवेक्षक बनाया गया है।

उत्तराखंड में भारी बहुमत से बीजेपी की जीत के बाद अब सवाल उठने लगे कि नई सरकार में कौन मुख्यमंत्री होगा। क्योंकि जिस चेहरे पुष्कर सिंह धामी के बल पर चुनाव लड़ा गया, वही चुनाव हार गए। अब बीजेपी उन्हें ही फिर से मौका देती है या फिर विधायकों के बीच से किसी को सीएम की कुर्सी पर नवाजा जाएगा, इस पर जल्द ही फैसला हो जाएगा। फिलहाल सूत्र तो यही बता रहे हैं कि विधायकों में से ही किसी को मुख्यमंत्री बनाने को लेकर फैसला लिया जाएगा। ऐसे में धामी का दोबारा मुख्यमंत्री बनना मुश्किल है। सीएम चयन को लेकर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और धर्मेंद्र प्रधान उत्तराखंड आएंगे। इन नेताओं को पर्यवेक्षक बनाया गया है। उनके देहरादून पहुंचने पर पार्टी संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ ही विधायकों की राय ली जानी है। ये दोनों पर्यवेक्षक आलाकमान के निर्देशों के अनुसार काम करेंगे।
वही दूसरी ओर उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पद को लेकर कई तरीके के कयास चल रहे हैं। हालांकि सूत्रों के हवालों से खबर मिली है कि मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर विधायकों में से सतपाल महाराज और धन सिंह के नामों की चर्चा है। दोनों नाम पूर्व में भी चर्चा में रहे हैं। वहीं अगर विधायकों से जुदा यदि पार्टी बाहर से मुख्यमंत्री के चेहरा तलाशती है तो उसके लिए तीन प्रमुख नामों की चर्चा शुरू हो गई है। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी और केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट के नाम लिए जा रहे हैं।
बीजेपी में सीएम के लिए कई सक्षम लोगों की लंबी लाइन है। वहीं, दो नवनिर्वाचित विधायकों में एक ने धामी और दूसरे ने पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के पक्ष में सीट छोड़ने का ऐलान भी किया है। चुनाव हारने के बावजूद भी भी माना जा रहा था कि पार्टी नेतृत्व धामी को फिर अवसर दे सकता है। इसके लिए धामी को काम करने के लिए मिले कम समय का हवाला दिया जा सकता है।
चर्चा ये भी रही कि भाजपा पुष्कर सिंह धामी को किसी सुरक्षित सीट से दोबारा चुनाव लड़ाकर, उन्हें मुख्यमंत्री बनाना चाहती है। कारण ये भी है कि उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ने के कारण ही बीजेपी को भारी सफलता मिली। चुनाव परिणामों को लेकर गदगद भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी जीत का श्रेय पुष्कर सिंह धामी को दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि कई बार युद्ध में सेनापति या तो घायल हो जाता है, या फिर शहीद हो जाता है। ऐसे ही चुनावी युद्ध में धामीजी भले ही अपनी सीट नहीं बचा पाए, लेकिन उनकी मेहनत और कार्यकर्ताओं के जोश से बीजेपी दोबारा सत्ता में काबिज हो रही है।
वहीं, चम्पावत से चुनाव जीते विधायक कैलाश गहतौड़ी की ओर से धामी के लिए सीट खाली करने की पेशकश कर चुके हैं। यह भी तर्क दिया जा रहा कि जिस तरह से बंगाल में टीएमसी ने चुनाव हारने के बाद भी ममता बनर्जी को ही अपना नेता चुना, उसी तरह का प्रयोग भाजपा यहां भी कर सकती है। इसके अलावा पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का नाम भी अचानक चर्चाओं में आ गया है।
डोईवाला से नवनिर्वाचित भाजपा प्रत्याशी बृजभूषण गैरोला ने पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के लिए अपनी सीट खाली करने का ऐलान किया है। पत्रकारों की ओर से पूछे गए सवाल में उन्होंने कहा कि यदि उनके नाम पर चर्चा होती है तो वह सहर्ष अपनी कुर्सी खाली कर देंगे। उन्होंने कहा कि त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सीएम रहते हुए प्रदेश के विकास के लिए ऐतिहासिक कार्य किया, सुशासन किया। ऐसे योग्य और ईमानदार के लिए सीट खाली करनी पड़ी तो ये मेरा सौभाग्य होगा। हालांकि त्रिवेंद्र सिंह रावत भी विधानसभा चुनाव नहीं लड़े। ऐसे में यदि विधायकों में से ही चयन किया जाता है, तो धामी और त्रिवेंद्र के दोबारा सीएम बनने का सपना फिलहाल पूरा होते नजर नहीं आ रहा है।

Bhanu Prakash

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भानु बंगवाल
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।