Loksaakshya Social

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

April 16, 2026

डीपफेक युग में एआई पर एसआरएचयू जौलीग्रांट में अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान, छात्रों को बताए अवसर और खतरे

देहरादून के डोईवाला क्षेत्र में स्थित एसआरएचयू स्कूल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी जौलीग्रांट में डीपफेक के युग में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसः अवसर, जोखिम और जिम्मेदार नवाचार, विषय पर अंतरराष्ट्रीय अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। इसमें विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डीपफेक तकनीक के विभिन्न पहलुओं को सरल और प्रभावी ढंग से समझाया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

मुख्य वक्ता नुसा पुत्रा विश्वविद्यालय इंडोनेशिया के डॉ. टैडी मंटोरो ने बताया कि डीपफेक तकनीक उन्नत एआई मॉडलों पर आधारित होती है, जो बड़े पैमाने पर डाटा का विश्लेषण कर वास्तविक जैसे दिखने वाले वीडियो, चित्र और ऑडियो तैयार करती है। उन्होंने जनरेटिव एडवर्सेरियल नेटवर्क (जीएएन) जैसे मॉडलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये तकनीकें नकली और असली सामग्री के बीच अंतर करना बेहद कठिन बना देती हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

डॉ. मंटोरो ने डीपफेक के सकारात्मक उपयोगों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसका इस्तेमाल शिक्षा में आभासी शिक्षण सामग्री तैयार करने, स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रशिक्षण और सिमुलेशन तथा मनोरंजन उद्योग में रचनात्मक प्रयोगों के लिए किया जा सकता है। इससे जटिल विषयों को अधिक रोचक और सहज तरीके से समझाया जा सकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने इसके दुष्परिणामों को लेकर गंभीर चिंता भी जताई। उन्होंने विद्यार्थियों को सचेत करते हुए सलाह दी कि किसी भी डिजिटल सामग्री पर आंख मूंदकर विश्वास न करें और उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें। कार्यक्रम के दौरान महानिदेशक (शैक्षणिक विकास) डॉ. विजेंद्र चौहान और प्रिंसिपल डॉ. प्रमोद कुमार ने डॉ. टैडी मंटोरो को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। अंत में विद्यार्थियों ने डीपफेक की पहचान, नियंत्रण और एआई में करियर से जुड़े सवाल पूछे, जिनका मुख्य वक्ता ने विस्तार से उत्तर दिया।
नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो। यदि आप अपनी पसंद की खबर शेयर करोगे तो ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी। बस इतना ख्याल रखिए।

Bhanu Bangwal

लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *