पीएम की विदेश यात्राओं को लेकर विदेशी समाचार पत्र उड़ा रहे मजाक, भारत की छवि को पहुंच रहा आघातः वैभव वालिया
कांग्रेस के संचार विभाग के राष्ट्रीय सचिव एवं उत्तराखंड में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वैभव वालिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की विदेश यात्राओं से भारत का विदेश में डंका बजने की बजाय मजाक उड़ाया जा रहा है। इसके लिए उन्होंने ब्रिटिश समाचार पत्र ‘द गार्डियन’ में हाल की में प्रकाशित खबर का हवाला दिया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कांग्रेस नेता वैभव वालिया ने कहा कि ब्रिटिश समाचार पत्र ‘द गार्डियन’ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विदेशी यात्राओं के दौरान मिलने वाले सम्मानों की बढ़ती सूची पर एक आलोचनात्मक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इस रिपोर्ट का शीर्षक “Give him any award, and he’ll come running” (उन्हें कोई भी अवॉर्ड दीजिए, वे दौड़े चले आएंगे) है। उन्होंने कहा कि ये खबर सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मजाक नहीं है, बल्कि भारत के सम्मान को भी धक्का है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि देश में चाहे जो भी गंभीर संकट हो, लेकिन पीएम मोदी को इसकी परवाह नहीं है। उन्हें तो विदेश में जाकर अपने गले में मैडल लटकाने की अजीब धुन सवार हो रखी है। द गार्डियन की खबर का मुख्य बिंदू सेशेल्स का पुरस्कार है। इस विवाद की शुरुआत पीएम मोदी की सेशेल्स यात्रा के दौरान उन्हें ‘गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ सम्मान दिए जाने से हुई। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, यह पुरस्कार पीएम मोदी के दौरे से ठीक कुछ दिन पहले ही बनाया गया था और वे इसके पहले प्राप्तकर्ता थे। इसके अलावा, प्रमाण पत्र में कुछ स्पेलिंग की गलतियां थीं और ऑनलाइन सॉफ्टवेयर द्वारा इसे कथित तौर पर ‘AI-जनित’ बताया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि पीएम मोदी को ये सम्मान पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के खिलाफ प्रयासों, सतत विकास (सस्टेनेबल डेवलपमेंट) के क्षेत्र में दिया गया। दावा किया गया कि यह सेशेल्स का सर्वोच्च सम्मान है। जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री पारिस्थितिक तंत्र को सुरक्षित रखने और सतत विकास के उनके विजन के लिए प्रदान किया गया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि भारत में जंगल के जंगल दो सेठों को सौंपे जा रहे हैं। विकास के नाम पर पेड़ों पर आरियां चल रही हैं। अब तो अंडमान और निकोबार में भी पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की तैयारी चल रही है। पर्यावरण असंतुलन के चलते देश के कई शहरों का तापमान हर साल रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच रहा है। अच्छा होता कि पीएम अपने देश के पर्यावरण में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
वैभव वालिया ने कहा कि भारत और सेशेल्स के बीच द्विपक्षीय व्यापार का कुल मूल्य लगभग 8.5 करोड़ (85 मिलियन) डॉलर का है।आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इसमें भारत का निर्यात करीब 7.6 करोड़ डॉलर और सेशेल्स से भारत का आयात करीब 86 लाख डॉलर का रहता है। वहीं, जून 2026 में 19 प्रमुख समझौतों पर भारत और सेशेल्स हस्ताक्षर किए गए हैं। भारत ने सेशेल्स में विकास परियोजनाओं के लिए ₹1,250 करोड़ (लगभग 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर) के आर्थिक पैकेज और ऋण सीमा (Line of Credit) की घोषणा की है। इसके साथ ही, सेशेल्स में भारतीय डिजिटल पेमेंट सिस्टम (UPI) को लागू करने पर भी सहमति बनी है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
कांग्रेस नेता वालिया ने कहा कि साफ है कि सेशेल्स के साथ भारत का व्यापार बहुत ज्यादा नहीं है। भारत में 80 करोड़ लोग मुफ्त अनाज पर निर्भर हैं। वहीं, पीएम उस देश को 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर के आर्थिक पैकेज की घोषणा करते हैं। ये बात समझ से परे है। उन्होंने कहा कि काला धन वापस लाने की बात करने वाले पीएम मोदी की सेशेल्स की यात्रा पर भी सवाल उठते हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सवाल इसलिए उठते हैं कि सेशेल्स का ‘हवाला’ (Hawala) से संबंध एक प्रमुख वित्तीय और कानूनी मुद्दा है। सेशेल्स एक ‘टैक्स हेवन’ (कर पनाहगाह) और ऑफ-शोर वित्तीय केंद्र के रूप में जाना जाता है, जो विदेशों में अवैध धन, काले धन को सफेद करने (Money Laundering) के साथ ही हवाला के जरिए धन के लेनदेन का एक मुख्य केंद्र रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
अब अवार्ड को लेकर विदेश मंत्रालयसफाई दे रहा है। दूसरी ओर, सेशेल्स के विदेश मंत्रालय भी सफाई दे रहा है कि ‘गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ एक वास्तविक और विधिवत अनुमोदित सम्मान है। गलती से एक कच्चा ड्राफ्ट (working draft) प्रसारित हो गया था। उन्होंने कहा कि सवाल अवार्ड का नहीं है, सवाल ये है कि सौ से ज्यादा विदेश यात्रा पर जाने वाले पीएम मोदी बताएं कि अब तक उनकी यात्राओं से देश का कितना भला हुआ। कितनी बेरोजगारी खत्म हुई। देश भर में एक लाख स्कूल बंद कर दिए गए, लेकिन ये भी बता दें कि कितने नए सरकारी स्कूल खोले गए हैं। जनता अब इन सवालों का जवाब मांग रही है। यदि यही हाल रहा तो बीजेपी के पास ना तो किसी राज्य में सत्ता रहेगी और जनता उसे केंद्र की गद्दी से भी बाहर करेगी।
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