संध्या पूजा के साथ दुर्गा महोत्सव शुरू, पूजा पंडाल में देर रात तक जुटे श्रद्धालु
देहरादून में दूनधाटी मां दुर्गा पूजा सेवा समिति (रजि) के तत्वावधान में आयोजित होने वाले 11वें दुर्गा महोत्सव का संध्या पूजा के साथ आगाज हो गया। कालिन्दी एन्क्लेव शोभा पैलेस में सोमवार की शाम से शुरू हुए समारोह में देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ रही। पहले दिन श्री दुर्गा देवी बोधन के साथ ही महाषष्ठी पूजा की गई। इस मौके पर विधिवत पूजा की शुरूआत मुख्य अतिथि एवं प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने की। इस अवसर पर उन्होंने मां की अखंड जोत को प्रज्ज्वलित किया। उन्होंने लोगों को शारदीय नवरात्र की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दुनिया में माँ का ओहदा सबसे बड़ा है। इसीलिए हमारी सनातन परंपरा में सारे त्यौहार साल में एक बार आते हैं, किंतु माँ भगवती के नवरात्र साल में चार बार आते हैं। दो बार गुप्त रूप से व दो बार चैत्र व शारदीय नवरात्र के रूप में।
उन्होंने कहा कि इस नवरात्र हम सब को मां भगवती से प्रार्थना करनी चाहिए कि जिस प्रकार उन्होंने शुम्भ, निशुम्भ, महिसासुर, मधु कैटभ जैसे असुरों का संहार किया। उसी प्रकार कलयुग में अवतरित कोरोना नामक दैत्य का संहार कर मानवता को इस मुसीबत से मुक्ति दिलवाए। पूजा अर्चना बंगाली पंडित शिव शंकर ने सम्पन्न करवाई।
इस मौके पर समिति के अध्यक्ष रामपदजना, संरक्षक धर्म सोनकर, प्रो प्रदीप सिंह, डाक्टर आर एन शर्मा ,जेके सिंह, एमएन पराशर, हरीश चन्द्र झा, विनीत सिंह, नन्दकिशोर, मनीष गुप्ता, शिवप्रसाद, विजय कुमार, एसएन सिंह, एके सिंह, अंजन कुमार, सुरेश कुमार, शरदकुमार, गौतम सोनकर, माधवी जाना, शोभा सोनकर, रोमा, रीमा, कंचन, निमई जाना, छोटे लाल, कुलदीप जखमोला, नीरज गुप्ता, विनीत सिंह, अनुज दत्त शर्मा, अनंत आकाश, महेश जोशी आदि भी उपस्थित रहे।
ये हैं कार्यक्रम
आज मंगलवार को सुबह साढ़े आठ बजे से महासप्तमी पूजा होगी। पुष्पांजलि और प्रसाद वितरण 11 बजे, दिन में एक बजे भोग, रात सात बजे संध्या आरती होगी। 13 अक्टूबर को महाअष्टमी पूजा सुबह से शुरू होगी। पुष्पांजलि और प्रसाद वितरण दोपहर 11 बजे से, संधी पूजन और बलिदान सवा ग्यारह से सवा बारह बजे तक, दोपहर एक बजे भोग होगा। 14 अक्टूबर को महानवमी पूजा होगी। सुबह 11 बजे पुष्पांजलि व प्रसाद वितरण, इसके बाद भोग, हवन व भंडारा दोपहर एक बजे तक होगा। रात को संध्या आरती होगी। 15 अक्टूबर को सुबह आठ बजे दशमी पूजा होगी। नौ बजे सिंदूर खेला होगा। इसके बाद विजर्जन के लिए दुर्गा की प्रतिमा हरिद्वार के लिए सुबह दस बजे प्रस्थान करेगी। रात आठ बजे शांति जल एवं विजय सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।



