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January 9, 2026

देहरादून सिटीजन फोरम की नॉलेज सीरीजः ट्रैफिक जाम का स्थायी समाधान नहीं है एलिवेटेड सड़कें

देहरादून सिटीजन फोरम (DCF) की ओर से देहरादून में रिस्पना- बिंदाल नॉलेज सीरीज़ भाग–2 का आयोजन आज गुरुवार को किया गया। इस मौके पर शहरी मोबिलिटी विशेषज्ञ अमित बघेल ने देहरादून में प्रस्तावित रिस्पना–बिंदाल एलिवेटेड कॉरिडोर (RBEC) परियोजना पर पुनर्विचार की जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि एलिवेटेड सड़कें ट्रैफिक जाम को कम नहीं करतीं, बल्कि लंबे समय में समस्या और बढ़ाती हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

गौरतलब है कि देहरादून में दो बरसाती नदियां रिस्पना और बिंदाल के ऊपर एलिवेटेड रोड बनाने का प्रस्ताव उत्तराखंड कैबिनेट से पारित हो चुका है। इस प्रस्ताव का देहरादून में विभिन्न सामाजिक संगठन और विपक्षी राजनीतिक दल विरोध कर रहे हैं। कारण ये है कि इस परियोजना के चलते नदी किनारे सैकड़ों मकान तोड़े जाएंगे। वहीं, पर्यावरणविद् भी इन नदियों के ऊपर सड़क निर्माण को पर्यावरण की दृष्टि से खतरनाक बता रहे हैं। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में पेड़ों के कटाने से देहरादून का पर्यावरण बिगड़ेगा। साथ ही नदी किनारे की बस्तियों के कई घरों में बुलडोजर चलेगा। मांग ये भी की जा रही है कि प्रभावितों को समुचित मुआवजा दिया जाए और उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। कई माह से इस परियोजना को लेकर प्रदर्शन भी हो रहे हैं। वहीं, ये मामला हाईकोर्ट भी पहुंचा हुआ है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

देहरादून सिटीजन फोरम की गोष्ठी के दौरान अमित बघेल ने ऑनलाइन संबोधन के दौरान कहा कि टियर–2 शहरों की असली जरूरत मजबूत सार्वजनिक परिवहन, सुरक्षित फुटपाथ और पैदल चलने योग्य सड़कें हैं, न कि महंगी एलिवेटेड सड़कें। उन्होंने बताया कि लोग यह तय नहीं करते कि वे पैदल चलेंगे या वाहन से जाएंगे, बल्कि शहर की सड़क संरचना यह तय करती है। जहां फुटपाथ और सार्वजनिक परिवहन नहीं होते, वहां लोग मजबूरी में निजी वाहन अपनाते हैं। चौड़ी सड़कें और एलिवेटेड रोड अधिक वाहनों को आकर्षित करती हैं, जिससे कुछ समय बाद वे भी जाम हो जाती हैं। इसे इंड्यूस्ड डिमांड कहा जाता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

अमित बघेल ने कहा कि एलिवेटेड रोड पर चलने वाले वाहनों को अंततः नीचे उतरना ही पड़ता है, जिससे एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर भारी जाम लग जाता है। अब तक कोई भी शहर इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं खोज पाया है। नदियों के ऊपर एलिवेटेड सड़क बनाने पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यह न केवल पर्यावरण और नदी तंत्र को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि आसपास के रिहायशी इलाकों, फुटपाथों और स्थानीय सड़कों पर भी नकारात्मक असर डालता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने जोर दिया कि देहरादून जैसे शहर में छोटी दूरी की यात्राओं के लिए पैदल चलना और साइकिल सबसे बेहतर विकल्प हैं, लेकिन फुटपाथों की कमी लोगों को वाहन इस्तेमाल करने पर मजबूर करती है। वर्तमान में सार्वजनिक परिवहन की हिस्सेदारी मात्र 6 प्रतिशत है, जिसे बेहतर सेवाओं से बढ़ाया जा सकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

देहरादून की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने कहा कि यहां मेट्रो जैसी परियोजनाएं व्यवहारिक नहीं हैं। उन्होंने 2019 में बने और 2024 में अपडेट हुए देहरादून कम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें कई अच्छे सुझाव हैं, लेकिन सवाल यह है कि कितने सुझाव वास्तव में लागू होंगे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने मांग की कि यदि रिस्पना–बिंदाल पर एलिवेटेड रोड बनाई जाती है, तो उसके पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों की पूरी जानकारी पारदर्शी तरीके से जनता के सामने रखी जाए। नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि यह परियोजना शहर की पहचान और पर्यावरण को कैसे प्रभावित करेगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कार्यक्रम का संचालन देहरादून सिटीजन फोरम की ऋतु चटर्जी ने किया। भारती जैन ने सार प्रस्तुत किया और अनूप नौटियाल ने बताया कि रिस्पना–बिंदाल नॉलेज सीरीज़ आगे भी जारी रहेगी। गौरतलब है कि पहले सत्र में पुणे के नदी विशेषज्ञ सारंग यादवकर ने चेतावनी दी थी कि नदियों पर एलिवेटेड कॉरिडोर से देहरादून में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। इस ऑनलाइन बैठक में देहरादून सिटीजन फोरम के 40 से अधिक स्थानीय सदस्य शामिल हुए।
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Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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