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July 19, 2026

ग्राफिक एरा में वाटर रिसोर्स मैनेजमेंट पर सम्मेलन, विशेषज्ञों का प्राकृतिक जल संचय पर जोर

देहरादून में ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में एडवांसेज इन वॉटर रिसोर्सेज मैनेजमेंट एंड एनवायरमेंटल रिसर्च पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन आज विशेषज्ञों ने पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण के लिए नवीनतम रिसर्च के इम्पलीमेंटेशन पर जोर दिया। साथ ही जल संचय और प्राकृतिक जल स्रोतों की देख रेख के लिए जीआईएस, सॉफ्ट कंप्यूटिंग जैसे एप्लीकेशन के साथ-साथ स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी चर्चा हुई। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

सम्मेलन में राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रुड़की के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ सोबन सिंह रावत ने हिमालय के झरनों के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि पहाड़ों का जीवन झरनों पर निर्भर है। पहाड़ी झरने न केवल मानवीय बसावटो के लिए उपयोगी है वरन नदियों में भी निरंतर जल की आपूर्ति बनाए रखते हैं। नदियों का भविष्य इन प्राकृतिक झरनों पर निर्भर है। इसके लिए प्राकृतिक जल स्रोतों के संवर्धन के क्षेत्र में हो रहे हैं अनुसंधानो का व्यवहारिक रूप में उपयोग करना होगा जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में जल संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

एनआईएच के वैज्ञानिक डॉ दीपक सिंह बिष्ट ने जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्षा के वार्षिक पैटर्न मैं बदलाव आ रहा है जिसके दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं। उन्होंने जल प्रबंधन के लिए एक सक्रिय वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्यकता बताई। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट आफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज के वैज्ञानिक इंजीनियर समरेश भट्टाचार्य ने कहा की कुशल जल संसाधन के प्रबंधन के लिए वार्षिक वर्षा पैटर्न की भविष्यवाणी और विश्लेषण मुख्य कारक होते हैं। इसके लिए सॉफ्ट कंप्यूटिंग तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

आईआईटी रुड़की के रिसर्च स्कॉलर गगनदीप सिंह ने फ्लैश फ्लड के प्रभावों को आंकने के लिए रिमोट सेंसिंग, जीआईएस प्रौद्योगिकी पर प्रकाश डाला। सम्मेलन के वेलेडिक्टरी समारोह में भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के वैज्ञानिक डॉ के. रमेश, ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के सिविल इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ संजीव कुमार, डॉ के एस रावत, सहायक प्रोफेसर पी जे रामा राजू और अन्य शिक्षक मौजूद रहे।