अग-जग धूम मच रही देखो, लगती कितनी मनभावन होली मीठी -मीठी गुजिया, भुजिया संग भीगी -भागी सी मस्त है होली॥...
नारी मंच
उत्तराखंड में बेरोजगारों के आंदोलन पर युवा कवयित्री अंजली चंद की कविता-आज का युवा सड़क मे भटक रहा है
आज का युवा सड़क मे भटक रहा है, वो अपने ही मित्र प्रशासन से पिट रहा है, उसे अब सही...
वो यूँ खुद को अक्सर दिखाते हुए भी खुद को छिपाता है कर अपनी ग्लानि को वो प्रत्यक्ष हमें बहुत...
तिरंगा तिरंगा देश की शान तू देश की आन भी है तू देश अखण्ड है इसका पुख्ता - प्रमाण भी...
तुझको नमन है नमन तुझको तिरंगे तेरी शान भी निराली है तीन रंगों से बना है, तेरी महिमा गौरवशाली है...
मजदूरी में किया कार्य मेहनताना माँगता है नित जीवन ही हमें यहाँ सियासत सिखाता है और लहू के रिश्ते हमें...
डर और उम्मीद डर उसके चले जाने का उम्मीद उसके ठहर जाने की डर उसे खो देने का उम्मीद उसे...
वक्त का दरिया वक्त का दरिया बहता रहता, बहते दौर का हर इक लम्हा। केवल यादें बन कर, ठहरा सा,...
माँ तुम्हारें बिना सारी खुशिया बेमानी सी लगती हैं कितना मुश्किल है माँ माँ तुम्हारे से बिना कुछ कहे सुने...
बस! देखते-देखते ये साल भी गुज़र गया देखने सुनने और समझने में ये साल भी गुजर गया, गुज़र गया लम्हा...
