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January 8, 2026

अंकिता भंडारी हत्याकांडः देहरादून में विभिन्न दलों और संगठनों ने किया सीएम आवास कूच, अल्मोड़ा के सल्ट में कांग्रेस ने निकाली न्याय यात्रा

अंकिता भंडारी हत्याकांड के मामले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर उत्तराखंड में पहाड़ से लेकर मैदान तक विभिन्न विपक्षी राजनीतिक दलों के लोगों के साथ ही कई सामाजिक संगठन से जुड़े लोग लगातार आंदोलन कर रहे हैं। आज रविवार को कई संगठन और विपक्षी पार्टियों के लोगों ने राजधानी देहरादून में विशाल रैली निकाली। सीएम आवास कूच के दौरान प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रास्त में रोक दिया। इस पर प्रदर्शनकारी सड़क पर धरने पर बैठ गए। वहीं, अल्मोड़ा जिले में सल्ट विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस ने न्याय यात्रा निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच और कथित वीआईपी पर कार्रवाई की मांग को लेकर देहरादून में कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों और राज्य आंदोलनकारी संगठनों ने रविवार को मुख्यमंत्री आवास कूच किया। इस दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। दिलाराम चौक पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच नोंकझोंक भी हुई, जिसके बाद प्रदर्शनकारी हाथीबड़कला क्षेत्र में धरने पर बैठ गए। सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि उनका यह प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया जा रहा है। सामाजिक और जन संगठनों, विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों ने कहा कि अंकिता केस मे नए आरोपों के बाद अब इस मामले की फिर से जांच करने की आवश्यकता है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

चिह्नित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय प्रवक्ता महेश जोशी ने कहा कि राज्य आंदोलनकारी संगठनों के आह्वान पर बड़ी संख्या में लोग मुख्यमंत्री आवास कूच में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पहाड़ की अस्मिता और देवभूमि की संस्कृति को बचाने का आंदोलन है। अंकिता भंडारी का जघन्य हत्याकांड प्रदेशवासियों के लिए गहरा जख्म है, जिसने देवभूमि की छवि को कलंकित किया है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

महेश जोशी ने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोग अहंकारी हो गए हैं और अंकिता हत्याकांड में संलिप्त लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। हाल की घटनाओं में कथित वीआईपी का नाम सामने आने के बावजूद सरकार कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट के सीटिंग जज की निगरानी में कराई जाए।(खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि भाजपा छोटी-छोटी बातों पर बवाल खड़ा कर देती है, लेकिन इतने गंभीर मामले में चुप्पी साधे हुए है, जिससे जनता में भारी रोष है। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में धरना-प्रदर्शन हो रहे हैं। इसके बावजूद सरकार के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है। महेश जोशी ने यह भी घोषणा की कि दिल्ली में चिह्नित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के मुख्य संरक्षक धीरेन्द्र प्रताप के नेतृत्व में उत्तराखंड के प्रवासी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे। इस मौके पर चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संघ समिति के देहरादून जनपद अध्यक्ष विशंभर बौथियाल ने भी सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

मुख्यमंत्री आवास कूच में चिन्हित राज्य अधिकारी सैनिक समिति की केंद्रीय अध्यक्ष सावित्री नेगी, केंद्रीय मीडिया विभाग के संयोजक नवीन जोशी, कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री मनीष नागपाल, नवीन मैठानी समेत कई नेता शामिल रहे। कांग्रेस की ओर से मुख्य प्रवक्ता गरिमा दसोनी और महिला कांग्रेस की अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने भी राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

सल्ट में निकाली न्याय यात्रा, करन माहरा ने सरकार पर किया हमला
उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सीडब्लूसी सदस्य श्री करन माहरा ने आज सल्ट विधानसभा क्षेत्र में महिला शक्ति, युवाओं और क्षेत्र की जनता के साथ मिलकर अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए न्याय यात्रा में प्रतिभाग किया। इस मौके पर माहरा ने कहा कि यह यात्रा केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की जनता के धैर्य के टूटने और सरकार के प्रति गहरे अविश्वास का प्रतीक है। हर कदम, हर नारा इस बात का गवाह था कि प्रदेश की जनता अब आधे-अधूरे न्याय और लीपापोती को स्वीकार नहीं करेगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

माहरा ने आगे कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में आज भी सबसे बड़ा सवाल जस का तस खड़ा है कि आख़िर वह ‘वीआईपी’ कौन है, जिसे बचाने के लिए एक बेटी को आज तक पूरा न्याय नहीं मिल पाया? उन्होंने कहा कि भाजपा के पूर्व विधायक एवं मंत्री के वायरल ऑडियो में कथित तौर पर वीआईपी के नाम का खुलासा किया जा रहा है। इसके बावजूद पुष्कर सिंह धामी की सरकार आंखों पर पट्टी बांधकर क्यों बैठी है? क्या यह चुप्पी किसी मजबूरी का परिणाम है या सत्ता के संरक्षण की सच्चाई? (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

करन माहरा ने सरकार को चेताते हुए आगे कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक बेटी की निर्मम हत्या के बाद भी सरकार निष्पक्ष सीबीआई जांच से बचने का हर संभव प्रयास कर रही है। बुलडोज़र चलाकर सबूत मिटाने के आरोप, प्रशासनिक अधिकारियों के बदलते बयान और अब वायरल ऑडियो, ये सभी घटनाक्रम सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। अगर सरकार के पास छिपाने को कुछ नहीं है, तो सीबीआई जांच से डर कैसा? (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

उन्होंने कहा कि यह मामला केवल अंकिता तक सीमित नहीं है। यह उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा, न्याय व्यवस्था की साख और राज्य के मूल उद्देश्य का प्रश्न है। क्या इसलिए उत्तराखंड राज्य का निर्माण हुआ था कि सत्ता और रसूख़ के आगे न्याय को कुचल दिया जाए? क्या इसलिए आंदोलनकारियों ने बलिदान दिए थे कि गरीब और सामान्य परिवार की बेटियों की आवाज़ को दबा दिया जाए? (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष माहरा ने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस पार्टी और प्रदेश की जनता मांग करती है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की तत्काल निष्पक्ष सीबीआई जांच कराई जाए, वीआईपी का नाम सार्वजनिक किया जाए और दोषियों को किसी भी राजनीतिक दबाव से ऊपर उठकर कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाए। जब तक अंकिता को पूरा न्याय नहीं मिलता, तब तक हमारा संघर्ष सड़क से सदन तक जारी रहेगा। यह लड़ाई सत्ता के खिलाफ नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ है और इसमें उत्तराखंड की जनता अंत तक डटी रहेगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

अंकिता भंडारी हत्याकांड
बता दें कि पौड़ी जिले के यमकेश्वर प्रखंड के अंतर्गत गंगा भोगपुर स्थित वनन्तरा रिसोर्ट से 18 सितंबर 2022 की रात से संदिग्ध परिस्थितियों में रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी लापता हो गई थी। पुलिस ने जब जांच की तो पता चला कि हत्या कर उसका शव चीला नहर में फेंक दिया गया था। इस मामले में रिसोर्ट मालिक पुलकित आर्य, प्रबंधक सौरभ भास्कर और सहायक प्रबंधक अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया था। मुख्य आरोपी पुलकित आर्य पूर्व बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री विनोद आर्य का बेटा है। पुलकित आर्य रिजॉर्ट का मालिक है। विनोद आर्य और उनके दूसरे बेटे अंकित आर्य को बीजेपी ने निष्कासित कर दिया था। इस मामले में चर्चा ये भी रही कि किसी वीआईपी को खुश करने के लिए अंकिता पर दबाव बनाया जा रहा था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इस मामले में राजनैतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्तियों के शामिल होने और ढ़ंग से जाँच नहीं होने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार मिला। अंकिता की माँ के दावों से मामले को अधिक तूल मिला। पुलिस के आरोप में प्रभावशाली व्यक्तियों के शामिल होने के दावे को शामिल नहीं किया। आज तक वीआईपी के नाम का खुलासा नहीं हुआ। इस मामले के प्रमुख अभियुक्त पुलकित आर्य (रिज़ॉर्ट के मालिक), अंकित गुप्ता (रिज़ॉर्ट के सहायक प्रबंधक) और सौरभ भास्कर (रिज़ॉर्ट के प्रबन्धक) हत्या की बात कबूल कर ली। कोटद्वार कोर्ट में हुई सुनवाई में तीनों को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

हाल ही में अचानक इस मामले में नया खुलासा हुआ है। ये खुलासा बीजेपी के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की दूसरी पत्नी उर्मिला सनावर ने इस नाम को उजागर किया। इसका वीडियो सोशल मीडिया में डाला गया। इसमें दावा किया गया कि वीआईपी बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री एवं प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम हैं। साथ ही राज्य में बीजेपी के एक पूर्व महामंत्री संगठन का नाम भी इस प्रकरण से जोड़ा गया है। ऐसे में नाम सामने आने के बाद इस हत्याकांड में सैकड़ों सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं, बीजेपी के प्रदेश के महामंत्री संगठन अजय कुमाार का नाम भी इस हत्याकांड में काफी समय पहले ही आ चुका है। हालांकि, इस मामले में कोई जांच नहीं की गई।
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Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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