Loksaakshya Social

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

June 28, 2026

राष्ट्रपति चुनाव से पहले रक्षा क्षेत्र में कई समझोते कर सकते हैं अमेरिका और भारत

अमेरिका में तीन नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव हो रहे हैं। इन चुनाव से पहले भारत और अमेरिका के बीच रक्षा क्षेत्र में कई अहम समझौते हो सकते हैं। दोनों देशों के बीच 27 अक्टूबर को 2 प्लस 2 वार्ता है। माना जा रहा है कि इस दौरान इसका ऐलान हो जाएगा।
अमेरिका विदेश विभाग ने किया भारत का स्वागत
वार्ता के पहले अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि वह अग्रणी क्षेत्रीय शक्ति और वैश्विक शक्ति के तौर पर उभरते भारत का स्वागत करता है। अमेरिका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के अगले कार्यकाल के दौरान उसके साथ प्रगाढ़ सहयोग को लेकर आश्वस्त है। विभाग ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के शीर्ष अधिकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सरकार के अन्य शीर्ष नेताओं और कारोबारी सहयोगियों से भी मिलेंगे। वार्ता के तहत अमेरिका-भारत वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाया जाएगा।
ये होंगे वार्ता में शामिल
यह भारत व अमेरिका के बीच टू प्लस टू स्तर के तीसरे चरण की वार्ता है। टू प्लस टू के तहत दोनों देशों के विदेश मंत्रियों और रक्षा मंत्रियों के बीच रणनीतिक मुद्दों पर वार्ता होती है। अमेरिकी की ओर से विदेश मंत्री माइक पोंपियो व रक्षा मंत्री मार्कटी एस्पर नई दिल्ली में होने वाली इस वार्ता में शामिल होने के लिए भारत रवाना हो चुके हैं। भारत की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर वार्ता में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे।
सेनाओं के बीच अहम सूचनाएं साझा हो सकेंगी
इस करार से अमेरिका अपने सैन्य सैटेलाइट के जरिये संवेदनशील भौगोलिक क्षेत्रों की अहम सूचनाएं तुरंत ही भारत से साझा कर पाएगा। पिछले हफ्ते अमेरिका ने कहा था कि लद्दाख में भारत-चीन के बीच गतिरोध पर उसकी पैनी नजर है। वह भारत के साथ सूचनाएं साझा कर रहा है और नहीं चाहता कि हालात और बिगड़ें।
पोंपियो ने ट्वीट कर दी जानकारी
अमेरिकी विदेश मंत्री पोंपियो ने रविवार रात को एक ट्वीट कर कहा था कि वह भारत, श्रीलंका, मालदीव और इंडोनेशिया के दौरे पर रवाना हो रहे हैं। उन्होंने कहा था कि अमेरिका अपने क्षेत्रीय सहयोगी देशों के साथ मिलकर हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र आवाजाही और मजबूत सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा।