Loksaakshya Social

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

January 16, 2026

एम्स ऋषिकेश का अध्ययन, आयरन और कैल्शियम बढ़ाते हैं मोटे अनाज के लड्डू, महिलाओं के लिए फायदेमंद

एम्स ऋषिकेश की ओर से किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि मिलेट आधारित लड्डू के सेवन से युवा महिलाओं के शरीर में आयरन और कैल्शियम के स्तर में पर्याप्त बढ़ोत्तरी होती है। मिलेट आधारित पूरक आहार का दैनिक तौर पर सेवन, युवा महिलाओं में आयरन और कैल्शियम स्तर सुधारने का एक प्रभावी और किफायती कदम साबित हो सकता है। संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने शोध को तथ्यात्मक बताते हुए निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए टीम की सराहना की है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

मिलेट्स या मोटे अनाज में ज्वार, बाजरा, रागी (फिंगर मिलेट), कोदा, कंगनी (फॉक्सटेल), कुटकी, सामा (लिटिल मिलेट), और झंगोरा (बार्नयार्ड) आदि प्रमुख हैं। ये प्रोटीन, फाइबर और खनिजों से भरपूर होते हैं। इस अनाज से बने लड्डू टीन एज की महिलाओं के लिए कितना लाभकारी हैं। इस विषय पर एम्स के कॉलेज ऑफ नर्सिंग की छात्राओं को प्रतिभागी बनाकर गहन शोध किया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

शोध में पाया गया कि इन लड्डुओं के सेवन से विशेष तौर से युवतियों के शरीर में विभिन्न पोषक तत्वों की बढ़ोत्तरी होती है और उनके शरीर के वजन अथवा संरचना में कोई नकारात्मक प्रभाव भी नहीं पड़ता है। संस्थान के कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्रिंसिपल प्रो. डॉ. स्मृति अरोड़ा के नेतृत्व में किए गए इस शोध टीम में शरीर क्रिया विज्ञान विभाग से डॉ. पूर्वी कुलश्रेष्ठ, सीएफएम से डॉ. रंजीता, नर्सिंग फेकल्टी डॉ. जेवियर वेल्सियाल और न्यूट्रीशियन फॉसिया मदाला शामिल थे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

100 से अधिक छात्राएं हुईं शोध में शामिल
इस अध्ययन में हॉस्टल में रहने वाली 18 से 23 वर्ष उम्र की 100 से अधिक स्नातक नर्सिंग छात्राओं को शामिल किया गया। उन्हें दो अलग-अलग समूहों में बांटा गया था। प्रायोगिक समूह की छात्राओं को 90 दिनों तक प्रतिदिन 50 ग्राम मिलेट-आधारित लड्डू के साथ नियमित आहार दिया गया, जबकि दूसरे नियंत्रण समूह की छात्राओं को केवल हॉस्टल का रूटीन आहार ही दिया गया। प्रशिक्षित आहार विशेषज्ञ द्वारा मानकों के आधार पर तैयार किए गए इन लड्डुओं में रागी (फिंगर मिलेट), भुना हुआ चना, गुड़ और घी का उपयोग किया गया था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

तीन महीने तक चला शोध
तीन महीने तक चले शोध में पाया गया कि प्रायोगिक समूह की छात्राओं में मिलेट लड्डू के सेवन से हीमोग्लोबिन, सीरम फेरिटिन और सीरम कैल्शियम के स्तर में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई। दूसरे समूह की छात्राओं में इन मानकों में कोई बढ़ोत्तरी देखने को नहीं मिली और इस समूह की छात्राओं का सीरम फेरिटिन स्तर भी कम था। प्रो. स्मृति अरोड़ा ने बताया कि शोध में यह भी पुष्टि हुई कि दोनों समूहों की छात्राओं में बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) में भी किसी प्रकार की उल्लेखनीय परिवर्तन नहीं देखा गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्व
हॉस्टल में रहने वाली युवा छात्राएं अनियमित आहार और मासिक धर्म के दौरान रक्तस्राव के कारण सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं। यह अध्ययन दर्शाता है कि मोटा अनाज (मिलेट) जो किफायती और पौष्टिक होते हैं, वो बिना वजन बढ़ाए शरीर में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करने का एक टिकाऊ समाधान प्रदान करते हैं। इस निष्कर्ष के आधार पर कॉलेज हॉस्टल, संस्थागत भोजन योजनाओं और सामुदायिक पोषण कार्यक्रमों में मिलेट आधारित स्नैक्स को शामिल करना लाभकारी हो सकता है।
नोटः सच का साथ देने में हमारा साथी बनिए। यदि आप लोकसाक्ष्य की खबरों को नियमित रूप से पढ़ना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आप्शन से हमारे फेसबुक पेज या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते हैं, बस आपको एक क्लिक करना है। यदि खबर अच्छी लगे तो आप फेसबुक या व्हाट्सएप में शेयर भी कर सकते हो। यदि आप अपनी पसंद की खबर शेयर करोगे तो ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी। बस इतना ख्याल रखिए।

Bhanu Bangwal

लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
मेल आईडी-bhanubangwal@gmail.com
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *