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July 16, 2026

रामपुर तिराहाकांड में पीएसी के दो जवान दुष्कर्म के मामले में दोषसिद्ध, 18 मार्च को होगा सजा का ऐलान

दिल्ली जा रहे उत्तराखंड आंदोलनकारियों को मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा में रोक कर हुए गोलीकांड के दौरान महिलाओं से दुष्कर्म के मामले में कोर्ट ने 30 साल बाद तत्कालीन उत्तर प्रदेश की पीएसी के दो जवानों को सामूहिक दुष्कर्म, छेड़छाड़ और षड्यंत्र आदि का दोषसिद्ध करार दिया है। सजा सुनाने के लिए कोर्ट ने 18 मार्च की तारीख तय की है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

अपर जिला एवं सत्र न्यायायलय संख्या-7 के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह ने सीबीआई बनाम मिलाप सिंह मामले में बीते 5 मार्च को सुनवाई पूरी करने के बाद शुक्रवार को फैसले का दिन तय किया था। अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) राजीव शर्मा, सहायक शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) परवेंद्र सिंह के साथ ही उत्तराखंड आंदोलनकारियों की ओर से अनुराग वर्मा ने तर्क रखे। अभियोजन पक्ष सीबीआई की ओर से मामले में कुल 15 गवाह पेश किए गए थे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

शुक्रवार को दोनों अभियुक्तों पीएसी के जवान (अब सेवानिवृत्त) मिलाप सिंह और वीरेंद्र प्रताप को कस्टडी में कोर्ट में लाया गया। कोर्ट ने मामले में दोनों को दोषी करार दिया। तब पीएसी गाजियाबाद में तैनात सिपाही मिलाप सिंह मूल रूप से जनपद एटा के निधौली कलां थाना क्षेत्र के होर्ची गांव और वीरेंद्र प्रताप सिद्धार्थ नगर के गौरी गांव का निवासी है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

यह था मामला
एक अक्तूबर, 1994 को अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। देर रात रामपुर तिराहा पर पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया। आंदोलनकारी नहीं माने तो पुलिसकर्मियों ने फायरिंग कर दी, जिसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। तब आरोप लगे थे कि पुलिस के जवानों ने आंदोलनकारी महिलाओं के साथ दुष्कर्म भी किया। सीबीआई ने मामले की जांच की और पुलिसकर्मियों और अधिकारियों पर मुकदमे दर्ज कराए थे। सीबीआई ने कई मामले दर्ज किए, जो विभिन्न कोर्ट में चल रहे हैं। इन्हीं से से 25 जनवरी 1995 को उक्त पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज किए गए थे।
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