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January 19, 2026

20 नवंबर को बंद होंगे बदरीनाथ धाम के कपाट, कल से शुरू होगी प्रक्रिया, आरंभ होगी पंच पूजाएं

करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र बदरीनाथ धाम के कपाट 20 नवंबर को बंद कर दिए जाएंगे। इसके लिए कल यानी 16 नवंबर से धाम में पंच पूजाएं आयोजित होंगी।

करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र बदरीनाथ धाम के कपाट 20 नवंबर को बंद कर दिए जाएंगे। इसके लिए कल यानी 16 नवंबर से धाम में पंच पूजाएं आयोजित होंगी। अभी तक चार लाख पिचासी हजार से अधिक तीर्थयात्री उत्तराखंड के चार धाम पहुंचे। इससे पहले गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट बंद हो चुके हैं। बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद द्वितीय केदार मद्महेश्वर के कपाट 22 नवंबर को प्रात: शीतकाल के लिए बंद हो जायेंगे। इसके साथ ही 25 नवंबर को मद्महेश्वर मेला आयोजित होगा।
उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड ने बताया कि कल मंगलवार से भगवान बदरीविशाल जी की पंच पूजाएं शुरू हो जायेगी। 16 नवंबर को श्री गणेश भगवान की पूजा एवं कपाट बंद होंगे। 17 नवंबर श्री आदि केदारेश्वर जी के कपाट बंद हो जायेंगे। 18 नवंबर को खडग पुस्तक पूजन होगा। इस दिन से वेद ऋचाओं का पाठ बंद हो जायेगा। 19 नवंबर को मां लक्ष्मी जी की पूजा एवं आह्वान होगा। 20 नवंबर को शाम 6 बजकर 45 मिनट पर श्री बदरीनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो जाएंगे।
कपाट बंद होने के बाद 21 नवंबर को प्रात: आदि गुरु शंकराचार्य जी की पवित्र गद्दी रावल जी सहित श्री उद्धव जी, श्री कुबेर जी योग -ध्यान बदरी पांडुकेश्वर पहुंचेंगे। श्री उद्धव जी एवं श्री कुबेर जी योग -ध्यान बदरी पांडुकेश्वर में विराजमान हो जायेंगे। दिनांक 22 नवंबर को आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी एवं रावल जी श्री नृसिंह मंदिर जोशीमठ पहुंचेंगे। योग बदरी पांडुकेश्वर एवं श्री नृसिंह बदरी जोशीमठ में शीतकालीन पूजाएं शुरू हो जायेंगी।
उन्होंने बताया कि ऋषिकेश स्थित चारधाम यात्रा बस टर्मिनल पर सभी विभागों यथा चिकित्सा, पुलिस, परिवहन,यात्रा प्रशासन संगठन, पर्यटन‌, देवस्थानम बोर्ड,नगरनिगम के हेल्प डेस्क / यात्री पूछताछ काउंटर अभी भी कार्यरत हैं। हरिद्वार एवं ऋषिकेश यात्रा बस अड्डे से तीर्थयात्री श्री बदरीनाथ धाम रवाना हो रहे है। श्री बदरीनाएं ब्यवस्थाएं सुचारु हैं। श्री केदारनाथ भगवान की पंचमुखी उत्सव मूर्ति 6 नवंबर को कपाट बंद होने के बाद विगत सोमवार 8 नवंबर को पंचकेदार शीतकालीन गद्दीस्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में स्थापित हो चुकी है। इसके बाद से भगवान केदारनाथ जी की शीतकालीन पूजाएं शुरू हो गई हैं।
कपाट बंद होने के बाद परंपरागत रूप श्री गंगोत्री धाम की शीतकालीन पूजाएं गद्दीस्थल मुखवा ( मुखीमठ) तथा श्री यमुना जी की शीतकालीन पूजाएं खरसाली (खुशीमठ) में संपन्न हो रही हैं। उत्तराखंड चार धाम श्री बदरीनाथ, श्री केदारनाथ, श्री गंगोत्री, श्री यमुनोत्री में कपाट बंद होने के बाद शीतकालीन गद्दी स्थलों में छ: माह शीतकालीन पूजाएं होती हैं। आज तक चार लाख पिचासी हजार से अधिक तीर्थयात्री उत्तराखंड चारधाम दर्शन को पहुंच चुके हैं। श्री केदारनाथ धाम सहित श्री गंगोत्री-यमुनोत्री जी के कपाट शीतकाल हेतु बंद हो गये है। द्वितीय केदार श्री मद्महेश्वर जी के कपाट 22 नवंबर को शीतकाल हेतु बंद होंगे‌। 25 नवंबर को मद्महेश्वर मेला आयोजित होगा।

Bhanu Bangwal

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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।

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