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July 15, 2026

पांच साल की बच्ची से दुष्कर्म में सौतेले भाई को फांसी की सजा, पिथौरागढ़ में ऐसे मामले में पहली सजा

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में दुष्कर्म के मामले में सौतेले भाई को जिला फॉस्ट ट्रेक कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई। उसे पांच वर्षीय बच्ची के साथ छह माह तक दुष्कर्म के मामले में दोषी करार दिया गया।

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में दुष्कर्म के मामले में सौतेले भाई को जिला फॉस्ट ट्रेक कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई। उसे पांच वर्षीय बच्ची के साथ छह माह तक दुष्कर्म के मामले में दोषी करार दिया गया। अदालत ने इस मामले अत्यधिक घृणित बताया है। साथ ही पीड़िता को सात लाख रुपये का प्रतिकर देने के आदेश दिए हैं। पिथौरागढ़ जिले में दुष्कर्म के मामले में फांसी की सजा का यह पहला मामला है।
मामला अप्रैल 2021 का है। नेपाली मूल का जनक बहादुर अपने दो नाबालिग बच्चों और पांच वर्ष की सौतेली बहन के साथ जाजरदेवल थाना क्षेत्र के अंतर्गत रहता था। 32 वर्षीय जनक बहादुर अपनी सौतेली बहन को मारता पीटता था। इस मामले की कुछ लोगों ने जाजरदेवल थाने में सूचना दी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया दो नाबालिग बच्चों और पीड़िता को अपने संरक्षण में लिया।
दरअसल, क्षेत्र में उक्त परिवार के किसी नाते, रिश्तेदार के नहीं होने के कारण कोई भी इन बच्चों को संरक्षण में लेने वाला नहीं था। पुलिस ने 4 अप्रैल 2021 को बच्ची को एक संस्था के संरक्षण में दे दिया। बाद में पीड़ित बच्ची ने संस्था के सदस्यों को अपने साथ हुई घटना के बारे में बताया। उसने बताया कि उसके माता, पिता का निधन हो गया है। वह अपने सौतेले भाई जनक बहादुर के साथ रहती है। जनक बहादुर विगत छह माह से उसके साथ दुष्कर्म कर रहा है। उसके शरीर में चोट के निशान भी थे। बाद में चिकित्सकीय परीक्षण किया गया तो बालिका के शरीर में कई गंभीर घाव मिले।
मामले में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो, भादवि धारा 376, 323 सहित अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया।
मामले की सुनवाई विशेष न्यायालय पॉक्सो में चली। अभियोजन पक्ष की तरफ से शासकीय अधिवक्ता प्रमोद पंत और विशेष लोक अभियोजन प्रेम सिंह भंडारी ने पैरवी करते हुए संबंधित गवाहों को पेश किया। दोनों पक्षों और गवाहानों को सुनते हुए विशेष न्यायाधीश पॉक्सो डा. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने जनक बहादुर को दोषी करार देते हुए शुक्रवार को उसे फांसी की सजा सुनाई। न्यायाधीश डा. शर्मा ने इसे अति घृणित कृत्य बताया। उन्होंने कहा कि सौतेला भाई जिस तरह के कृत्य कर रहा था वह क्षम्य नहीं है। न्यायालय ने पीडिता के भरण पोषण व भविष्य के लिए सात लाख रुपए की धनराशि प्रतिकर के रूप में देने के आदेश दिए।
पिथौरागढ़ में दुष्कर्म मामले में फांसी की सजा का ये पहला मामला है। इससे पहले पिथौरागढ़ न्यायालय में एक महिला को फांसी की सजा हुई थी। उस मामले में महिला ने अपने दो नादान बच्चों को दराती से काट कर मार डाला था।