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August 24, 2026

राजस्थान में 30 दिन के भीतर बाल विवाह का रजिस्ट्रेशन जरूरी, विधानसभा में विधेयक पास, भाजपा ने बताया काला कानून

राजस्थान विधानसभा में राजस्थान विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक 2021 को शुक्रवार को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

राजस्थान में अब बाल विवाह रजिस्ट्रेशन होगा और अभिभावक, माता-पिता को 30 दिन पहले इसकी सूचना देनी होगी। दरअसल, राजस्थान विधानसभा में राजस्थान विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक 2021 को शुक्रवार को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इसके पारित होने से पहले इस पर चर्चा हुई, जिसका संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने जवाब देते हुए कहा कि यह विधेयक लाने के महत्वपूर्ण कारण हैं और विवाहों का पंजीकरण कानून 2009 के बाद जिला अधिकारी ही शादी का पंजीयन कर सकता था। अब अतिरिक्त जिला अधिकारी और ब्लाक अधिकारी को भी इसमें जोड़ा गया है।
मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी के विधायकों की आपत्ति और सदन से वॉकआउट के बीच राजस्थान विधानसभा में ये विधेयक पारित किया गया। बीजेपी ने दावा किया कि नए विधेयक से बाल विवाह वैध हो जाएंगे। उधर, सदन में राजस्थान अनिवार्य विवाह पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2021 का बचाव करते हुए संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि प्रस्तावित कानून विवाह के पंजीकरण की अनुमति देता है, लेकिन कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि ऐसी शादियां अंततः वैध हो जाएंगी। मंत्री ने कहा कि यदि यह वास्तव में बाल विवाह है तो जिलाधिकारी और संबंधित अधिकारी परिवारों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई कर सकेंगे।
मंत्री ने कहा कि विवाह प्रमाण पत्र एक कानूनी दस्तावेज है, जिसके अभाव में किसी भी विधवा को किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। उधर, विपक्ष ने इसे काला कानून’ करार देते हुए मांग की थी कि विधानसभा अध्यक्ष मत विभाजन कराएं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। तब विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए अध्यक्ष के आसन के करीब पहुंच गए। वहीं, ध्वनिमत से विधेयक पारित कर दिया गया। मत विभाजन की मांग स्वीकार नहीं किए जाने पर भाजपा सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
इससे पहले, विपक्ष के उपनेता राजेंद्र राठौर और भाजपा विधायक अशोक लाहोटी ने संशोधन विधेयक को काला कानून बताया और कहा कि यदि विधेयक पारित होता है तो काला दिन होगा। विधायक ने कहा कि यह विधेयक बाल विवाह की अनुमति देता है। संशोधन विधेयक के बयान और उद्देश्य में कहा गया है कि अगर जोड़े ने शादी की कानूनी उम्र पूरी नहीं की है तो माता-पिता या अभिभावक निर्धारित अवधि के भीतर एक आवेदन जमा करने के लिए जिम्मेदार होंगे।