अंगद का पैर नहीं हिला सके रावण के शूरवीर, हनुमान लेकर आए संजीवनी, भक्तिमय हुआ रामलीला पंडाल

देहरादून के डोईवाला क्षेत्र में हिमालयन रिक्रिएशनल एंड वेलफेयर ट्रस्ट की ओर से स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय, जौलीग्रांट के सेंट्रल पार्क में रामलीला मंचन जारी है। रामलीला महोत्सव के आठवें दिन रामेश्वर स्थापना, रावण दरबार, विभीषण का लंका से निष्कासन, अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण शक्ति और हनुमान जी के संजीवनी बूटी लाने के प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
मंचन की शुरुआत समुद्र तट पर प्रभु श्रीराम द्वारा रामेश्वर शिवलिंग की स्थापना से हुई। इसके बाद लंका में रावण दरबार का दृश्य दिखाया गया। विभीषण ने रावण को सीता को लौटाने की सलाह दी। उसे समझाने का भरसक प्रयास किया। वहीं, अहंकार में डूबे रावण ने क्रोधित होकर उन्हें लात मारकर लंका से निकाल दिया। विभीषण प्रभु श्रीराम की शरण में आ गए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
सबसे आकर्षक प्रसंग अंगद-रावण संवाद रहा। दूत बनकर लंका पहुंचे अंगद ने रावण को समझाने का प्रयास किया, लेकिन अहंकारी रावण नहीं माना। इस पर अंगद ने अपना पैर जमीन पर जमा दिया। कहा कि यदि कोई योद्धा मेरा पैर हिला दे तो श्रीराम सीता को भूल जाएंगे। रावण के बड़े-बड़े योद्धा पैर हिलाने में असफल रहे। अंत में रावण स्वयं आया, तो अंगद ने पैर हटाकर कहा- मेरे पैर नहीं, मेरे प्रभु श्रीराम के चरण पकड़, तेरा कल्याण होगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)इसके बाद युद्ध में मेघनाद के शक्ति बाण से लक्ष्मण मूर्छित हो गए। राम का विलाप देखकर पूरा पंडाल भावुक हो गया। तब सुषेण वैद्य की सलाह पर हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने गए और पूरा पर्वत ही उठा लाए। संजीवनी की सुगंध से लक्ष्मण उठ खड़े हुए और पंडाल ‘जय बजरंगबली’ के जयकारों से गूंज उठा। रामलीला के नौवें दिन 19 अक्टूबर को कुंभकरण वध, मेघनाद वध, सती सुलोचना प्रसंग, अहिरावण वध, मकरध्वज प्रसंग, रावण वध का मंचन होगा।
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Bhanu Bangwal
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भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।



