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August 21, 2026

दिल्ली में शाह की पुलिस ने उत्तराखंड के कांग्रेसियों को रोका, चुनाव आयोग गायब, कार्यालय के गेट पर धरना, सौंपा ज्ञापन

उत्तराखंड के कांग्रेस के नेताओं के प्रतिनिधिमंडल को उस समय दिल्ली में चुनाव आयोग के गेट के पास गृह मंत्री अमित शाह की पुलिस ने रोक दिया, जब वे एसआईआर में गड़बड़ी की शिकायत को लेकर चुनाव आयोग से मिलना चाह रहे थे। चुनाव आयोग के गेट पर रोके जाने पर कांग्रेस नेता भड़क गए। चुनाव आयोग ने मुलाकात का समय नहीं दिया तो कांग्रेस नेता गेटे के बाहर सड़क पर ही बैठ गए। मुख्य चुनाव आयोग गायब रहे। गुरुवार को कुछ देर धरने के बाद में आयोग के अधिकारियों ने गेट पर पहुंचकर ज्ञापन स्वीकार किया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इस दौरान उत्तराखंड कांग्रेस नेताओं ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत झूठी आपत्तियां दर्ज करने और अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर लोकतंत्र की मजबूती व निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया की मांग उठाई। इस दौरान उत्तराखंड प्रभारी कुमारी शैलजा ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में एसआईआर के नाम बड़ी धांधली हो रही है। कांग्रेस की ओर से कई बार मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात कर योग्य मतदाताओं के नाम हटाने के लिए दर्ज की जा रही झूठी आपत्तियों पर शिकायतकर्ता के खिलाफ सख्त कानूनी करने की मांग की, लेकिन आयोग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। एक व्यक्ति की ओर कई आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं। झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

 

उन्होंने कहा कि हम सब आज निर्वाचन आयोग के पास एक मेमोरेंडम देने पहुँचे थे। उत्तराखंड में SIR के नाम पर जो इतनी बड़ी धांधली हो रही है, उसके गंभीर तथ्य आयोग के सामने रखना चाहते थे। हमारे योग्य मतदाताओं के नाम गलत तरीके से सूची से काटे जा रहे हैं। किसी को कह दिया जाता है कि वह अपने पते पर रहता ही नहीं है। युवा लोगों तक को मृत घोषित कर दिया जाता है, किसी को अनुपस्थित दिखा दिया जाता है। आपको हैरानी होगी कि एक ही व्यक्ति न जाने कितने लोगों के नाम काटने की शिकायत बार बार दे रहा है, लेकिन शिकायतकर्ता कौन है, उसका नाम और अता पता क्या है, इसका कुछ पता नहीं चलता। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि नोटिस देने के नाम पर कागजी कार्रवाई दिखाई जाती है, लेकिन लोगों तक नोटिस पहुँचते ही नहीं हैं। जो लोग यह गलत काम कर रहे हैं, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही। सबसे दुख की बात यह है कि निर्वाचन आयोग अपने आपको भाजपा सरकार की गलत नीतियों से ऊपर क्यों नहीं रख रहा है? हमने हमेशा निर्वाचन आयोग का आदर किया है। कांग्रेस की सरकारों के समय निर्वाचन आयोग का एक रुतबा और गरिमा होती थी। कहीं कुछ गलत होता था, चाहे सत्ता पक्ष ही क्यों न हो, आयोग गलत काम को नहीं होने देता था। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर एक नागरिक की शिकायत की अहमियत है। हमारे संविधान के अनुसार हर नागरिक के मताधिकार की अहमियत है। आज भाजपा सरकार का संविधान में विश्वास दिखाई नहीं देता और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा की भी लगातार धज्जियां उड़ रही हैं। कई दिन से समय मांगने के बावजूद चुनाव आयोग मिलने का समय तक नहीं दे रहा है। करीब आठ लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि हम कई दिनों से मिलने का समय मांग रहे हैं, लेकिन वो हमें समय नहीं दे रहे हैं। हम उन्हें अपना एक प्रतिवेदन देना चाहते हैं कि यह हमारी शंकाएं हैं, शिकायते हैं और आप इनका निराकरण करें। यह चुनाव आयोग का अधिकार है। उन्हें हमसे हमारा प्रतिवेदन लेना पड़ेगा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने भी चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि चुनाव आयोग को अपने प्रतीक के रूप में जंजीर और ताला अपना लेना चाहिए। खेड़ा ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग के दरवाजे जनता और उसके प्रतिनिधियों के लिए बंद होना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस पिछले आठ दिनों से आयोग से मिलने का समय मांग रही थी, लेकिन समय नहीं मिला, जिसके कारण नेताओं को आयोग के गेट तक आना पड़ा। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

वहीं उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र और बिहार की तरह उत्तराखंड में भी चुनाव से पहले मतदाता सूची में गड़बड़ी की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि पात्र मतदाताओं के नाम कथित तौर पर हटाए जा रहे हैं। आर्य के मुताबिक, कांग्रेस ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन उनकी शिकायतों पर सुनवाई नहीं हुई। आर्य ने आरोप लगाया कि कांग्रेस विचारधारा से जुड़े मतदाताओं के नाम चुन-चुनकर हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे के खिलाफ एकजुट होकर लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ेगी। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

पिरान कलियर विधानसभा क्षेत्र से विधायक फुरकान अहमद ने कहा उनके पिता पांच बार सरपंच रहे हैं, जबकि उनके भाई भी तीन बार सरपंच रह चुके हैं। उन्होंने बताया वर्ष 1996 में उन्होंने चुनाव लड़ा और बाद में वर्ष 2007 में भी चुनाव मैदान में रहे. इसके बावजूद उनके नाम पर यह आपत्ति लगाई गई कि वह यहां के रहने वाले नहीं हैं। विधायक फुरकान अहमद का आरोप है कि उनके नाम से आपत्ति लगाए जाने की जानकारी मिलने के बाद जब उन्होंने संबंधित व्यक्ति से संपर्क किया तो उसने आपत्ति लगाने से ही इनकार कर दिया। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उन्होंने बताया कि इसके बाद वह व्यक्ति स्वयं उनके साथ एसडीएम कार्यालय पहुंचा। अधिकारियों के सामने कहा कि उसने कोई आपत्ति दाखिल नहीं की है। उन्होंने कहा यदि किसी व्यक्ति के नाम का इस्तेमाल कर फर्जी तरीके से मतदाता सूची में आपत्ति दर्ज कराई गई है, तो ऐसी शिकायतों की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। इस मौके पर कांग्रेस नेता गुरदीप सिंह सप्पल, उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा भी मौजूद थे। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

उधर, दिल्ली में चुनाव आयोग कार्यालय पर प्रदर्शन के बाद देहरादून में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कांग्रेस के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलावा भेजा है। शुक्रवार को दोपहर तीन बजे सचिवालय स्थित आयोग कार्यालय में एसआईआर को लेकर वार्ता की जाएगी। केंद्रीय चुनाव आयोग ने एसआईआर को लेकर कांग्रेस की आपत्तियों को लेकर वार्ता के समय की मांग पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को बृहस्पतिवार को निर्देश दिए। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)

इस आधार पर उत्तराखंड के सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को पत्र भेजा। इसमें कहा गया है कि कांग्रेस के एसआईआर प्रकरण पर विचार-विमर्श के लिए उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल को 21 अगस्त को बुलाया गया है। ये भी कहा गया है कि अगर शुक्रवार को संभव न हो तो अपनी सुविधा के अनुसार मुख्य निर्वाचन अधिकारी की उपस्थिति में वार्ता के लिए किसी भी दिन आ सकते हैं। अब ये कांग्रेस नेताओं को तय करना है कि वे किस दिन वार्ता को मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मिलेंगे।
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